दिल्ली में GRAP-3 के बावजूद हवा हुई जहरीली, दिवाली से पहले 22 स्टेशनों पर AQI 400 पार

Share

- Advertisement -

Delhi News: दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-एनसीआर की हवा गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-3) लागू होने के बावजूद 22 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया। शनिवार को दिल्ली का औसत AQI 366 रहा, जबकि आईआईटी दिल्ली और पंजाबी बाग समेत कई इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।

राजधानी दिल्ली और आसपास के शहरों में त्योहारों से पहले प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तीसरे चरण यानी GRAP-3 की पाबंदियां लागू होने के बाद भी वातावरण में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। शनिवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, शहर के 22 निगरानी केंद्रों पर स्थिति और भी बिगड़ गई, जहां एक्यूआई 400 के पार जाकर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया।

किन इलाकों में स्थिति सबसे अधिक खराब?

राजधानी के विभिन्न निगरानी केंद्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार, सबसे गंभीर स्थिति आईआईटी दिल्ली क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां एक्यूआई 442 तक पहुंच गया। इसके अलावा पंजाबी बाग में 433, विवेक विहार में 427 और जहांगीरपुरी में 421 एक्यूआई दर्ज हुआ।

दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों की बात करें तो रोहिणी में 418, बवाना में 411, डीटीयू में 408, नरेला में 408 और अलीपुर में 402 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि वायु गुणवत्ता में गिरावट किसी एक हिस्से तक सीमित न रहकर पूरी राजधानी में फैली हुई है।

एनसीआर के शहरों में भी हालात चिंताजनक

दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों में भी हवा की गुणवत्ता सामान्य से काफी नीचे है। हरियाणा के गुरुग्राम में एक्यूआई 355 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। फरीदाबाद में भी हवा की स्थिति ठीक नहीं रही और वहां सूचकांक 347 दर्ज हुआ।

उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर दिल्ली और गुरुग्राम के मुकाबले थोड़ा कम रहा। नोएडा में एक्यूआई 284 और गाजियाबाद में 286 दर्ज किया गया। यद्यपि ये आंकड़े ‘खराब’ श्रेणी में आते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह स्तर भी जोखिम भरा है।

GRAP-3 की पाबंदियों का असर नहीं

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने GRAP-3 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाले चिन्हित वाहनों के संचालन पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। इन प्रशासनिक कदमों का मुख्य उद्देश्य धूल और धुएं के उत्सर्जन को घटाना है। हालांकि, मौजूदा वायुमंडलीय परिस्थितियों और आंकड़ों से साफ है कि पाबंदियों के बाद भी जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिल पा रही है।

स्वास्थ्य पर जोखिम और सूचकांक की श्रेणियां

दिवाली से ठीक पहले प्रदूषण के इस स्तर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस प्रकार की जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों और दमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत नुकसानदेह साबित हो सकती है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार:

  • 0 से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है।
  • 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’ और 201 से 300 ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
  • 301 से 400 के बीच एक्यूआई को ‘बेहद खराब’ माना जाता है।
  • 401 से 500 के बीच का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

वर्तमान में दिल्ली का औसत स्तर ‘बेहद खराब’ बना हुआ है, जबकि दर्जनों क्षेत्रों में यह ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच चुका है।

Read more

Related News