बिहार विधान परिषद भर्ती में पूर्व में ब्लैकलिस्ट रही एजेंसी के चयन पर उठे सवाल, पूर्व सभापति ने जांच की मांग की

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Patna News: बिहार विधान परिषद भर्ती प्रक्रिया में एजेंसी के चयन को लेकर विवाद गहरा गया है। परीक्षा और अभ्यर्थियों के चयन का जिम्मा जिस एजेंसी को सौंपा गया था, उसके पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए सभी भर्तियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

बिहार विधान परिषद में हाल ही में संपन्न हुई भर्ती प्रक्रिया के संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस भर्ती परीक्षा के आयोजन और अभ्यर्थियों के चयन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी सीएस डेटामाशन रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (CS Datamation Research Services Pvt. Ltd.) को दी गई थी। अब एजेंसी की पृष्ठभूमि और उसके चयन की प्रक्रियाओं को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

भर्ती जैसे संवेदनशील और प्रशासनिक कार्य के लिए एजेंसी के चयन को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या टेंडर प्रक्रिया के दौरान कंपनी के पुराने रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली की उचित जांच की गई थी।

एजेंसी के पुराने रिकॉर्ड और पूर्व कार्रवाई का संदर्भ

सामने आई जानकारियों के अनुसार, सीएस डेटामाशन रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर पूर्व में भी अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। नियमित मजदूर भर्ती परीक्षा से जुड़े एक पूर्व मामले में कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठने के बाद उच्च न्यायालय द्वारा एजेंसी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भी एजेंसी की भूमिका को लेकर जांच और विवाद की बातें चर्चा में रही हैं। ऐसे में विधान परिषद जैसी संवैधानिक संस्था की भर्ती का जिम्मा इसी एजेंसी को दिए जाने पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

इस पूरे विवाद पर बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई और कोई अनियमितता नहीं हुई।

अवधेश नारायण सिंह ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सुनियोजित राजनीतिक साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं, वे उनका पर्दाफाश करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बिहार विधानसभा और विधान परिषद में हुई सभी बहालियों की निष्पक्षता साबित करने के लिए सरकार से सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग

संवैधानिक संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और शुचिता बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अनिवार्य मानी जाती है। पूर्व में विवादों में रही एजेंसी को चयन का जिम्मा सौंपे जाने के बाद अब दस्तावेजों की जांच और चयन प्रक्रिया के मानकों की समीक्षा की मांग तेज हो रही है। पूरे मामले की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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