Kangra News: हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। यहां रोबोटिक सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट की बड़ी सुविधाएं तो मौजूद हैं, लेकिन मरीजों को बुखार की सामान्य गोली और इंजेक्शन भी बाहर की दुकानों से खरीदने पड़ रहे हैं।
टांडा अस्पताल पर कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर के लाखों मरीज निर्भर हैं। सैकड़ों किलोमीटर दूर से आने वाले तीमारदारों को यहां निराशा हाथ लग रही है। अस्पताल में पैरासिटामोल, उल्टी की एमसेट, एसिडिटी की पेनटाप, नॉर्मल सेलाइन, ग्लव्स और स्पिरिट जैसी बुनियादी चीजें भी उपलब्ध नहीं हैं।
सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में इलाज कराने पहुंचे दिल, किडनी और कैंसर के गंभीर मरीज भी दवाओं के लिए भटक रहे हैं। भूतल की डिस्पेंसरी में दवा न मिलने पर मरीज घंटों मुख्य ओपीडी की लंबी लाइन में लगते हैं। वहां भी दवा न मिलने पर तीमारदारों की फार्मेसी अधिकारियों के साथ तीखी बहस हो रही है।
इमरजेंसी वार्ड के हालात भी चिंताजनक बने हुए हैं। वहां रूई, पट्टी और सिरिंज तक उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल की सरकारी डिस्पेंसरी से केवल कैल्शियम और ब्लड प्रेशर जैसी गिनी-चुनी दवाएं ही मिल पा रही हैं। जबकि एस्प्रिन, सिट्राजिन और ट्रामाडोल इंजेक्शन जैसी जरूरी दवाओं के लिए मरीजों को बाजार की ओर दौड़ना पड़ रहा है।