Mandi News: प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी मंडी के सेरी मंच पर आयोजित राष्ट्रीय हथकर्घा दिवस प्रदर्शनी में एक लाख रुपये की शॉल और 30 हजार रुपये का मफलर छाया हुआ है। राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता कारीगर नरेश कुमार द्वारा तैयार की गई यह शॉल इस प्रदर्शनी में सबसे महंगी वस्तु बनी हुई है।
सेरी मंच पर 11 अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में करीब आठ से दस हथकर्घा और स्थानीय विक्रेता पहुंचे हैं। नरेश कुमार बताते हैं कि मंडी में प्रदर्शित यह दूसरी सबसे महंगी शॉल है। इससे पहले चार साल पूर्व अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में तीन लाख रुपये की शॉल बिक्री के लिए लाई गई थी।
महाभारत काल के चक्रव्यूह और रानी के नौलखे हार की बारीक कारीगरी
नरेश कुमार के अनुसार, इस एक लाख रुपये की शॉल में महाभारत काल के चक्रव्यूह की जटिल रचना को बुना गया है। इसके अलावा शॉल पर रानी के नौलखे हार, टका आकृति और मोर पंख के सुंदर डिजाइन बनाए गए हैं। खरगोश की ऊन से बनी इस शॉल को हाथों से तैयार करने में करीब छह से सात महीने का समय लगता है।
ऐसी दुर्लभ शॉलों की मुख्य रूप से किन्नौर में भारी मांग रहती है और वे इन्हें दिल्ली भी भेज चुके हैं। मंडी की इस प्रदर्शनी के लिए वे इसका सिर्फ एक ही पीस लाए थे। इसके अलावा इसी महीन कारीगरी से बना 30 हजार रुपये का मफलर भी लोगों को काफी पसंद आ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेंट की जा चुकी है नरेश कुमार की शॉल
नरेश कुमार अर्की में ‘तमन्ना ट्रेनिंग एंड सेल सेंटर’ नाम से एक छोटा उद्योग चलाते हैं। उन्होंने बताया कि करीब पांच-छह साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंडी आए थे, तब उन्हें भेंट की गई शॉल उन्होंने ही तैयार की थी। उस समय उसकी कीमत 35 हजार रुपये थी, जो आज बढ़कर 60 हजार रुपये हो चुकी है।
प्रदर्शनी के दौरान नरेश कुमार मौके पर ही एक छोटी खड्डी लगाकर शॉल और टोपियों के किनारों पर लगने वाली पट्टियों का निर्माण कर रहे हैं। इस अनोखी कला को लाइव देखने के लिए स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। प्रदर्शनी में अब तक उनकी 20 हजार की शॉल और 18 हजार का स्टॉल बिक चुका है।