Delhi News: मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के लिए केवल एमबीबीएस ही एकमात्र विकल्प नहीं है। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से पढ़ाई करने वाले छात्र आयुर्वेद के क्षेत्र में भी एक सफल करियर चुन सकते हैं। BAMS यानी बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी इस क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित अंडरग्रेजुएट डिग्री है।
बीएएमएस कोर्स की अवधि और मुख्य विषय
BAMS कोर्स की कुल अवधि 5.5 साल होती है, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इस कोर्स के दौरान छात्रों को आयुर्वेद के पारंपरिक सिद्धांतों के साथ-साथ मॉडर्न मेडिकल साइंस की भी गहन जानकारी दी जाती है। इसमें मुख्य रूप से एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी और पंचकर्म जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं।
एडमिशन के लिए जरूरी योग्यता और चयन प्रक्रिया
इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए उम्मीदवार का 12वीं में पीसीबी विषयों के साथ पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा NEET UG क्वालीफाई करना जरूरी है। नीट स्कोर और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर AACCC और राज्य स्तरीय काउंसलिंग के जरिए सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में सीटें अलॉट की जाती हैं।
बीएएमएस पूरा करने के बाद करियर के बेहतरीन विकल्प
डिग्री पूरी करने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर के पदों पर सरकारी नौकरी मिल सकती है। इसके अलावा, डॉक्टर्स खुद का क्लिनिक शुरू कर सकते हैं या पंचकर्म सेंटरों में कंसल्टेंट बन सकते हैं। उच्च शिक्षा के लिए मास्टर्स (MD/MS) करके टीचिंग और रिसर्च क्षेत्र में भी जाने का मौका मिलता है।