Haryana News: प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत के मामलों पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग 16 नवंबर से एक माह का विशेष अभियान शुरू करेगा। अभियान के तहत आशा वर्करों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाएगा। साथ ही जटिल परिस्थितियों से निपटने के लिए अस्पतालों के डिलीवरी स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जिले में प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामलों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग 16 नवंबर से एक महीने का विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान प्रसव के समय 50 महिलाओं और 23 नवजात शिशुओं की मौत दर्ज की गई है। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की व्यापक रूपरेखा तैयार की है।
आशा वर्कर संभावित तिथि से पहले पहुंचाएंगी अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई मामलों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू होने या स्थिति गंभीर होने के बाद अस्पताल लाया जाता है, जिससे समय पर आवश्यक डाक्टरी सहायता मिलने में देरी हो जाती है। अभियान के तहत आशा वर्कर अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की सूची के अनुसार उनसे संपर्क करेंगी। जिन महिलाओं के प्रसव की संभावित तिथि नजदीक होगी, उनके घर जाकर परिजनों को समय रहते अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर रहेगा विशेष ध्यान
इस अभियान के दौरान उन गर्भवती महिलाओं की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाएगी, जिन्हें पहले से स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी है या जिनका प्रसव जोखिम भरा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें महिलाओं को नियमित जांच कराने, चिकित्सकों की सलाह का पालन करने और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक करेंगी।
डिलीवरी स्टाफ को दिया जाएगा पुन: प्रशिक्षण
अभियान के तहत जागरूकता के साथ-साथ प्रसव कराने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अस्पतालों में डिलीवरी कराने वाले स्टाफ को दोबारा प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे प्रसव के दौरान आने वाली जटिल परिस्थितियों को समय रहते पहचान सकें और आवश्यकता पड़ने पर मरीज को तुरंत उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर सकें। सिविल सर्जन डॉ. बुधराम ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और शिविरों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।