मनीषा मौत मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, हाईकोर्ट के दोबारा जांच आदेश के बाद भिवानी में परिजनों की बैठक

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Bhiwani News: मनीषा मौत मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज किए जाने के बाद भिवानी में सामाजिक संगठनों और परिजनों की बैठक हुई। अदालत ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। परिजनों ने इसे न्याय की लड़ाई में अहम पड़ाव बताते हुए मोबाइल लोकेशन, कॉलेज के सीसीटीवी फुटेज और कथित सुसाइड नोट की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

भिवानी सिटी स्टेशन के पास स्थित स्वामी धर्मशाला में मनीषा मौत प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और परिजनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। अगस्त 2025 में हुई मनीषा की मौत के बाद परिजनों की मांग पर सरकार ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। हालांकि, एक साल की जांच के बाद पेश की गई सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से असंतुष्ट परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज करते हुए नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए हैं।

सवा साल के संघर्ष के बाद दोबारा जांच के आदेश

बैठक में मनीषा के पिता संजय और किसान नेता सुरेश कोथ ने बताया कि करीब सवा साल से परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। अधिवक्ता की मजबूत पैरवी के चलते हाईकोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने के बजाय दोबारा जांच कराने का निर्णय दिया। परिजनों का कहना है कि सीबीआई की जांच में कई अहम पहलुओं, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों को शामिल नहीं किया गया था, जिसके चलते कई गंभीर सवालों के जवाब अब तक अनुत्तरित हैं।

मोबाइल लोकेशन और 36 घंटे के घटनाक्रम पर सवाल

परिजनों ने मृतका की अंतिम कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पिता संजय के अनुसार, मोबाइल की अंतिम लोकेशन, फोन बंद होने का सटीक स्थान और रात 12 बजे हुई कॉल की लोकेशन को जांच में स्पष्ट नहीं किया गया।

इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत घटना से करीब 36 घंटे पहले हो चुकी थी। परिजनों का सवाल है कि उन 36 घंटों के दौरान मनीषा कहां थी और उसके साथ क्या हुआ। जिस रास्ते पर शव मिलने की बात कही गई, वहां हर पांच मिनट में आवाजाही रहती है, ऐसे में इतने लंबे समय तक किसी का ध्यान न जाना संदेह पैदा करता है।

सीसीटीवी फुटेज और सुसाइड नोट की सत्यता पर संदेह

परिजनों ने स्थानीय पुलिस जांच पर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों ने करीब 40 दिनों तक सीसीटीवी फुटेज अपने पास रखी और उसे समय पर आगे नहीं भेजा। इसके साथ ही कॉलेज की डीवीआर फुटेज में भी कथित छेड़छाड़ की बात सामने आई है।

अदालत में कथित सुसाइड नोट की लिखावट के मिलान का पहलू भी उठा, जिसमें हैंडराइटिंग का मिलान नहीं होने पर अदालत ने दो अलग-अलग स्थानों से जांच के निर्देश दिए हैं। परिजनों ने घटनास्थल से जहर की कोई शीशी या खरीद का प्रमाण न मिलने का हवाला देते हुए पूरे मामले की कॉलेज परिसर, डीवीआर फुटेज और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर पारदर्शी जांच की मांग की है।

Desh Raj
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