Kangra News: डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा में सोमवार को क्रसना लैब की सेवाएं ठप रहने से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दो महीने से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों ने सैंपल लेना बंद कर दिया, जिससे दूरदराज से आए मरीजों को बिना जांच के ही लौटना पड़ा या निजी लैबों का रुख करना पड़ा।
टांडा मेडिकल कॉलेज में ठप रही जांच सेवाएं
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा में सोमवार को क्रसना लैब की जांच सेवाएं प्रभावित होने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लैब में पूरे दिन मरीजों के सैंपल नहीं लिए गए, जिसके चलते दूरदराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना जांच करवाए ही बैरंग लौटना पड़ा। कई मरीजों को मजबूरन निजी लैबों में अधिक पैसे खर्च कर अपनी जांच करवानी पड़ी। टांडा अस्पताल में उपचार के लिए कांगड़ा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं, जिन्हें डॉक्टरों द्वारा विभिन्न जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
वेतन न मिलने से कर्मचारियों में रोष
क्रसना लैब में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले करीब दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन का भुगतान न होने और अन्य वित्तीय मामलों के लंबित रहने के कारण कर्मचारियों में भारी रोष है। टांडा मेडिकल कॉलेज की क्रसना लैब में करीब 44 से अधिक कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा।
हिमाचल में 100 करोड़ रुपये से अधिक की पेंडेंसी
मिली जानकारी के अनुसार, पूरे हिमाचल प्रदेश में क्रसना लैब की कुल पेंडेंसी करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि अकेले टांडा मेडिकल कॉलेज से संबंधित लंबित भुगतान का आंकड़ा 3 करोड़ रुपये से अधिक का है। लंबे समय से भुगतान न होने के कारण इसका सीधा असर अब लैब के कामकाज और कर्मचारियों के वेतन पर पड़ रहा है। इस स्थिति से परेशान मरीजों और उनके तीमारदारों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करें ताकि लंबित भुगतानों का समाधान हो सके और भविष्य में मरीजों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।