Shimla News: शिमला के संजौली चौक पर वाहन के डैशबोर्ड पर अनाधिकृत फ्लैशर लाइट के इस्तेमाल को लेकर पुलिसकर्मी और दो युवकों के बीच विवाद हो गया। बहस और धक्का-मुक्की के बाद संजौली थाना पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया है। वहीं युवकों द्वारा पिस्तौल तानने के लगाए गए आरोपों को एसपी ने निराधार बताया है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली चौक पर 22 अक्टूबर की रात यातायात ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी और दो युवकों के बीच तीखी झड़प का मामला सामने आया है। घटना उस समय हुई जब यातायात पुलिसकर्मी ने एक वाहन को उसके डैशबोर्ड पर अनाधिकृत फ्लैशर लाइट का उपयोग करने के चलते रोका। इस दौरान वाहन सवार युवकों द्वारा पुलिसकर्मी से बहस और धक्का-मुक्की की गई, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए हैं। मामले में संजौली पुलिस थाना में दोनों युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अनाधिकृत फ्लैशर लाइट रोकने पर शुरू हुआ विवाद
शिमला के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 22 अक्टूबर की रात संजौली चौक पर यातायात ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारी ने एक कार को रोका, जिसके डैशबोर्ड पर अनाधिकृत फ्लैशर लाइट लगी हुई थी। वाहन रोके जाने पर उसमें सवार व्यक्ति बाहर निकला और पुलिस कर्मचारी से उसका नाम व पद पूछने लगा। इसके बाद दोनों युवकों ने पुलिसकर्मी के साथ तीखी बहस की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा ड्यूटी के निर्वहन में बाधा उत्पन्न की। इस हंगामे के कारण सड़क पर कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित हुआ, जिसे देखकर मौके पर स्थानीय लोग भी एकत्र हो गए।
दो युवकों के खिलाफ BNS की धाराओं में मामला दर्ज
ट्रैफिक शाखा में तैनात पीड़ित पुलिस कर्मचारी की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस थाना संजौली में प्राथमिकी संख्या 74/2026 दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221 और 3(5) के तहत पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने नामजद आरोपियों की पहचान राहुल शर्मा (निवासी ढली, तहसील व जिला शिमला) और 23 वर्षीय अर्णव (निवासी लोअर कलस्टन, शिमला) के रूप में की है।
युवकों के पिस्तौल तानने के आरोपों का एसपी ने किया खंडन
घटना के बाद दोनों युवकों ने आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान पुलिसकर्मी ने उन पर पिस्तौल तानी थी। हालांकि, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। एसपी के अनुसार, केस दर्ज होने के बाद आरोपियों द्वारा बचाव में यह आरोप लगाया गया है और मौके से मिले तथ्यों व परिस्थितियों से इस आरोप की कोई पुष्टि नहीं होती है। वर्तमान में संजौली थाना पुलिस मामले की विस्तृत कानूनी जांच कर रही है।