Shimla News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी ने अगली पीढ़ी की सौर ऊर्जा तकनीकों पर विशेष कार्यशाला आयोजित की। इसमें इंजीनियरिंग के छात्रों को भवनों और सड़क ढांचे में सोलर सिस्टम लगाने की बारीकियां सिखाई गईं। इस आयोजन में विशेषज्ञों ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के नए विकल्पों पर मार्गदर्शन किया।
इस तकनीकी वर्कशॉप में बिल्डिंग और रोड इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स प्रणालियों पर विस्तार से मंथन हुआ। आधुनिक तकनीकों के जरिए भवनों और परिवहन नेटवर्क को बिजली उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है। जर्मन संस्था जीआईजेड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रांट थॉर्नटन और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों ने भागीदारी निभाई।
पारदर्शी सौर सामग्री और ऊर्जा दक्षता से खुलेंगे रोजगार के द्वार
उद्योग जगत से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने पारदर्शी सौर सामग्री और सोलर सिस्टम डिजाइन पर अहम सत्र लिए। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि आधुनिक फोटोवोल्टिक तकनीकों से बुनियादी ढांचे को पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा संयंत्र में बदला जा सकता है। छात्रों को उद्योग में चल रहे आधुनिक शोध और व्यावहारिक प्रयोगों से सीधे अवगत कराया गया।
संस्थान के समन्वयकों ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं छात्रों के किताबी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के अंतर को खत्म करती हैं। इससे युवाओं में नवाचार, शोध और नए तकनीकी कौशल का विकास होता है। समापन सत्र में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साझा प्रयासों को हरित ऊर्जा के भविष्य के लिए बेहद जरूरी बताया गया।
