New Delhi News: रिलायंस जियो ने 5जी के बाद अब अगली पीढ़ी की 6जी तकनीक की तैयारी तेज कर दी है। कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि जियो स्वदेशी सैटेलाइट तकनीक विकसित कर रहा है। इसके साथ ही प्री-6जी तकनीक के तहत कई पेटेंट भी फाइल किए जा चुके हैं।
आकाश अंबानी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान जियो की भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 6जी जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दे रही है। जियो का मुख्य उद्देश्य इन माध्यमों से दूरसंचार सेवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना है।
जियो अब सिर्फ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी ऐसी स्वदेशी सैटेलाइट तकनीक बना रही है, जिसे वैश्विक स्तर पर भारत से बाहर भी उपयोग में लाया जा सके। इस कदम से कंपनी तेजी से विकसित हो रहे सैटेलाइट कनेक्टिविटी बाजार में मजबूत दावेदारी पेश करेगी।
आकाश अंबानी ने कहा कि भारत 6जी तकनीक में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करना चाहता है। प्रधानमंत्री ने देश से 10 प्रतिशत 6जी पेटेंट का लक्ष्य रखा है। जियो रिसर्च, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के जरिए इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अपनी बड़ी भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कंपनी ने 6जी के व्यावसायिक उपयोग से पहले ही बौद्धिक संपदा और तकनीक तैयार करने पर काम शुरू कर दिया है। जियो ने प्री-6जी दौर में ही पेटेंट आवेदन कर दिए हैं। इसका सीधा मकसद नेटवर्क सुधारने के साथ-साथ अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा पहले ही तैयार करना है।
पारंपरिक दूरसंचार सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कंपनी वॉयस और डेटा में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है। आकाश अंबानी के अनुसार, एआई की मदद से कॉलिंग और डेटा सेवाओं में बड़े नवाचार संभव हैं। इस आधुनिक तकनीक का सीधा लाभ आने वाले समय में देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं को मिलेगा।
नई दिल्ली में 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जियो अपने डिजिटल समाज के विजन को पेश कर रहा है। इस सम्मेलन में 5जी, 6जी, एआई नेटवर्क और सैटेलाइट संचार पर चर्चा हो रही है। कंपनी आने वाले वर्षों में तीनों तकनीकों को जोड़कर नई डिजिटल सेवाएं पेश करेगी।
