Chandigarh News: पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पद छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्रोफाइल भी बदल दी। इस बड़े फैसले के बाद वे राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंच रहे हैं।
पंजाब में इस इस्तीफे के बाद सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद नवजोत सिंह सिद्धू की जगह राजा वड़िंग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद मिली थी कमान
कांग्रेस हाईकमान ने राजा वड़िंग को ऐसे समय पंजाब की बागडोर सौंपी थी, जब पार्टी भारी गुटबाजी का सामना कर रही थी। उस चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी। इसके बावजूद संगठन को एकजुट करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने युवा चेहरे के तौर पर वड़िंग पर भरोसा जताया था।
ट्रांसपोर्ट मंत्री रहते हुए रात में की थी बसों की चेकिंग
चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में जब राजा वड़िंग ट्रांसपोर्ट मंत्री बने थे, तब वे काफी चर्चा में रहे। वे नियमों की अनदेखी रोकने के लिए खुद रात में बसों की चेकिंग करने निकल पड़ते थे। इस दौरान उन्होंने बिना परमिट वाली बसों को जब्त किया और करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला था।
ब्लॉक स्तर से शुरू हुआ राजा वड़िंग का सियासी सफर
राजा वड़िंग ने अपनी राजनीतिक पारी पूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड़ के मार्गदर्शन में शुरू की थी। साल 2000 में वे मुक्तसर साहिब से ब्लॉक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इसके बाद वे 2005 में यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, 2008 में प्रदेश उपाध्यक्ष और 2014 में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंचे।
राजा वड़िंग साल 2012 में पहली बार गिद्दड़बाहा सीट से मनप्रीत बादल को हराकर विधायक बने थे। इसके बाद 2017 और 2022 में उन्होंने शिअद के हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों को हराया। वे कैप्टन सरकार में राजनीतिक सलाहकार रहे और आम आदमी पार्टी की लहर में भी तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।