भारतीय गुलगुलों जैसा है डोनट का इतिहास, जानिए बीच में छेद करके रिंग शेप बनाने के पीछे की दिलचस्प कहानी

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Lifestyle News: भारतीय रसोइयों में बनने वाले मीठे पुए या गुलगुलों की तरह ही पश्चिमी देशों का डोनट भी काफी लोकप्रिय है। दोनों की रेसिपी में भले थोड़ा अंतर हो, लेकिन इनका स्वाद दुनिया भर में पसंद किया जाता है। सदियों से आटे को तलकर मीठे व्यंजन बनाने की परंपरा कई सभ्यताओं में रही है।

इतिहास के पन्नों को देखें तो डोनट की शुरुआत न्यूयॉर्क में आए डच प्रवासियों के दौर में मानी जाती है। 17वीं और 18वीं सदी में डचों ने ‘ऑलीकोएक्स’ नाम से डिश बनाई, जिसका हिंदी अर्थ ‘ऑयल केक’ होता है। शुरुआत में डोनट्स गोल बॉल्स जैसे होते थे और उनके बीच मेवे और फल भरे जाते थे।

नाविक हेन्सन ग्रेगरी और रिंग शेप डोनट का रोचक किस्सा

डोनट्स के बीच में छेद करने का विचार 1850 के करीब आया, जिसका श्रेय अमेरिकी नाविक हेन्सन ग्रेगरी को दिया जाता है। एक लोककथा के अनुसार, समुद्री तूफान के दौरान जहाज का पहिया संभालते वक्त उन्होंने डोनट को पहिए की लकड़ी में फंसा दिया था। हालांकि इस कहानी के कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों की भूख मिटाने में मददगार

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान खाइयों में लड़ रहे सैनिकों की भूख मिटाने में भी डोनट्स ने अहम भूमिका निभाई। महिला वॉलंटियर्स इन्हें बनाकर सैनिकों तक पहुंचाती थीं, जिन्हें बाद में “डोनट लैसीज” नाम मिला। सीमित संसाधनों में कम सामग्री से तैयार होने के कारण मुश्किल समय में डोनट्स बनाना सबसे आसान विकल्प था।

Desh Raj
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