Ahmedabad News: अमेरिकी एविएशन सेफ्टी ग्रुप फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी यानी एफएएस ने भारत की जांच एजेंसी एएआईबी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। संस्था ने पूछा है कि अहमदाबाद में 260 मौतों वाले दर्दनाक विमान हादसे में बार-बार सिस्टम फेलियर के सबूत मिलने के बाद भी सुरक्षा गाइडलाइंस क्यों नहीं जारी की गईं।
विमान के गुप्त दस्तावेजों में तकनीकी खराबी का दावा
एफएएस का दावा है कि पिछले एक साल में दुर्घटनाग्रस्त विमान से जुड़े 100 से ज्यादा गैर-सार्वजनिक दस्तावेज मिले हैं। ये दस्तावेज यूके एएआईबी के विशेषज्ञ के माध्यम से भारतीय एजेंसी को सौंपे गए थे। इन रिकॉर्ड्स में विमान के इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और फ्लाइट कंप्यूटर सिस्टम में लगातार आ रही गंभीर खराबियों का स्पष्ट विवरण दर्ज है।
एफएएस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एड पियर्सन ने एएआईबी के महानिदेशक को ईमेल भेजकर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी तरीके से खुलासे न करके भविष्य की दुर्घटनाओं को रोकने का मुख्य मकसद कमजोर हो रहा है। इसके बावजूद वैश्विक विमानन समुदाय के लिए कोई भी अंतरिम सुरक्षा चेतावनी जारी नहीं की गई।
बोइंग के पूर्व मैनेजर ने दी थी उत्पादन खामियों पर चेतावनी
एड पियर्सन बोइंग की रेंटन 737 फैक्ट्री में पूर्व सीनियर मैनेजर रह चुके हैं। उन्होंने प्रोडक्शन टीमों के भारी वर्कलोड और गलतियों को लेकर अंदरूनी चेतावनी दी थी। अनदेखी के बाद उन्होंने एफएएस की स्थापना की, जो वैश्विक स्तर पर विमान सुरक्षा और निर्माण प्रक्रियाओं की निगरानी कर रही है।
एएआईबी ने अपने जवाब में पुष्टि की कि उसे जून में दस्तावेज प्राप्त हुए थे और टीम ने उनकी विस्तृत समीक्षा की है। एजेंसी ने दावा किया कि पूरी जांच निष्पक्ष और तय मानकों के तहत की गई है। हालांकि एफएएस के उस पत्र का कोई जवाब नहीं आया, जिसमें जानकारी दबाने के सीधे आरोप लगाए गए थे।