Mandi News: हिमाचल की सांस्कृतिक राजधानी मंडी में सदियों पुरानी देव मान्यताओं से जुड़ा देवताओं और डायनों का युद्ध एक बार फिर चर्चा में है। डगवांस की रात्रि से शुरू होने वाले इस संघर्ष को लेकर पुरानी मंडी स्थित सिद्धपीठ महाकाली मंदिर के 62वें जाग होम में गुर ने देववाणी की।
धधकते अंगारों पर नाचे गुर, 7 युद्धों की बताई शृंखला
वार्षिक जाग होम के दौरान गुर धधकते अंगारों पर नाचे। मंदिर परिसर में गूंजी देववाणी के अनुसार यह अलौकिक संघर्ष कुल सात अलग-अलग युद्धों की एक शृंखला होती है। चार युद्ध जीतने वाले पक्ष के हाथ में सिख पाथा का नियंत्रण आता है, जिससे आने वाले वर्ष की दिशा तय होती है।
समुद्र टापू से शुरुआत और घोघरधार में निर्णायक संघर्ष
लोक मान्यताओं के अनुसार इस अलौकिक युद्ध की शुरुआत एकादश की रात समुद्र टापू से होती है। विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए इसका अंतिम और निर्णायक युद्ध घोघरधार में लड़ा जाता है। इस बार जाग के दौरान सामने आई देववाणी के आधार पर डायनों का पलड़ा भारी रहने का संकेत दिया गया है।
जीत और हार से जुड़े हैं सुख-समृद्धि और संकट के संकेत
मान्यता के अनुसार देवताओं की विजय से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, उत्तम फसल और शांति का वास होता है। इसके विपरीत डायनों का प्रभाव बढ़ने पर प्राकृतिक आपदा, बीमारियों और संकट की आशंका जताई जाती है। वैज्ञानिक प्रमाण से परे यह परंपरा छोटी काशी की लोक संस्कृति का गहरा हिस्सा मानी जाती है।