Delhi News: विदेश में कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने पर भारी फीस लगाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव के तहत ग्रेजुएशन के बाद काम करने वाले विदेशी छात्रों को 1 लाख डॉलर देने पड़ सकते हैं।
अमेरिकी प्रशासन का यह प्रस्ताव फिलहाल विचार प्रक्रिया में है और इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। यह भारी-भरकम फीस ऑप्टिकल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के तहत ली जा सकती है। F-1 वीजा पर आने वाले छात्र ओपीटी के जरिए अपनी पढ़ाई से जुड़ी अस्थायी नौकरी हासिल करते हैं|
भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा असर
भारत से बड़ी संख्या में छात्र कर्ज लेकर पढ़ाई करने अमेरिका जाते हैं। पढ़ाई के बाद मिलने वाली नौकरी से छात्रों को कर्ज चुकाने और जरूरी काम का अनुभव हासिल करने में मदद मिलती है। यदि यह फीस लागू होती है, तो अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका में रहकर काम करना बेहद मुश्किल और महंगा हो जाएगा ।
यह प्रस्ताव इस समय होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के पास विचाराधीन है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि यह शुल्क छात्र देंगे या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियां। जानकारों का मानना है कि इस कदम से विदेशी छात्र अमेरिका जाने से बच सकते हैं ।
वीजा नियमों में भी बड़े बदलाव के संकेत
फीस के साथ-साथ अमेरिका नए वीजा नियम लागू करने पर भी विचार कर रहा है। मौजूदा व्यवस्था में जब तक छात्र पढ़ाई पूरी करते हैं, वे अमेरिका में रह सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत विदेशी छात्रों को केवल 4 साल रहने की मंजूरी मिलेगी। पढ़ाई लंबी चलने पर दोबारा अलग से आवेदन देना होगा ।
प्रशासन का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने और इमिग्रेशन सिस्टम पर निगरानी के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि, इन नियमों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने की सोच रहे भारतीय छात्रों के बजट पर असर पड़ेगा।