World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल और गैस कुओं से होने वाले मीथेन गैस उत्सर्जन पर लगाम लगाने वाले बाइडन कालीन संघीय नियम को समाप्त करने की घोषणा की है। टेक्सास में एक रैली के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इस कदम से उत्पादकों और उपभोक्ताओं के 45 अरब डॉलर बचेंगे तथा 21 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन संभव होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उनका प्रशासन तेल और गैस कुओं से जलवायु को गर्म करने वाली मीथेन गैस के उत्सर्जन पर अंकुश लगाने वाले बाइडन प्रशासन के नियम को खत्म करने जा रहा है। टेक्सास में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से ऊर्जा उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लगभग 45 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत होगी। इसके साथ ही करीब 21 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल निकालने का मार्ग प्रशस्त होगा, जो अमेरिका की लगभग 10 दिनों की पेट्रोलियम खपत के बराबर है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईंधन की ऊंची कीमतों को लेकर प्रशासन पर दबाव बना हुआ है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में घरेलू स्तर पर तेल की ड्रिलिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है।
मीथेन उत्सर्जन का पर्यावरणीय प्रभाव
वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती का तापमान बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैसों के कुल उत्सर्जन में मीथेन की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है। औद्योगिक क्षेत्रों से उत्सर्जित होने वाली मीथेन में सबसे बड़ा योगदान तेल एवं प्राकृतिक गैस उद्योग का ही रहता है। मीथेन प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक है और अल्पावधि में यह कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में वायुमंडल को कई गुना अधिक तेजी से गर्म करती है। ड्रिलिंग उपकरणों से रिसाव और तेल निष्कर्षण के दौरान गैस को जलाने (फ्लेयरिंग) से यह वातावरण में सीधे घुलती है।
‘सुपर एमिटर प्रोग्राम’ समाप्त करने की तैयारी
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के प्रमुख ली जेल्डिन ने पहले ही इन नीतिगत बदलावों के संकेत दिए थे। नए प्रस्ताव के तहत एजेंसी का ‘सुपर एमिटर प्रोग्राम’ समाप्त किया जाएगा, जिसके अंतर्गत तेल कंपनियों के लिए बड़े मीथेन लीकेज की जांच और मरम्मत अनिवार्य थी। इसके अतिरिक्त, छोटे तेल और गैस कुओं के लिए भी उत्सर्जन मानकों को लचीला बनाया जाएगा।
ईपीए प्रमुख जेल्डिन ने बाइडन कालीन नियमों की आलोचना करते हुए कहा कि इन्हें लागू करने में 18 अरब डॉलर खर्च होते, जिससे अमेरिकी ऊर्जा उद्योग की प्रगति धीमी पड़ जाती। उन्होंने कहा कि एजेंसी अमेरिका की पूर्ण ऊर्जा क्षमता के दोहन के लिए प्रतिबद्ध है।
पर्यावरण संगठनों ने फैसले पर जताई गंभीर चिंता
पर्यावरण संगठनों और विशेषज्ञों ने इस नीतिगत बदलाव की कड़ी आलोचना की है। पर्यावरण कानून एवं नीति केंद्र (ELPC) के अधिवक्ता मैक्स लोपेज ने कहा कि नियमों को शिथिल करने से प्रदूषण का सीधा बोझ उन समुदायों पर पड़ेगा जो पहले से ही पर्यावरणीय संकट झेल रहे हैं। इससे ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में तैयार नियमों के तहत 2038 तक करीब 5.8 करोड़ टन मीथेन उत्सर्जन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अन्य गैसों में भारी कटौती का लक्ष्य रखा गया था। इससे पूर्व बराक ओबामा के कार्यकाल में भी मीथेन उत्सर्जन रोकने के प्रयास हुए थे, जिन्हें ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में सीमित कर दिया था।