ट्रेन के वॉशरूम में पानी न होने पर रेलवे पर लगा जुर्माना, यात्री को 23 परिजनों संग बीच रास्ते उतरना पड़ा था

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National News: ट्रेन के वॉशरूम में पानी की किल्लत के कारण 24 यात्रियों को बीच सफर में उतरने पर मजबूर होना पड़ा। इस मामले में कर्नाटक के शिवमोग्गा जिला उपभोक्ता आयोग ने दक्षिण पश्चिम रेलवे को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराते हुए यात्री को टिकट रिफंड, मुआवजा और अदालती खर्च चुकाने का आदेश दिया है।

कर्नाटक के शिवमोग्गा स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रेन के कोच में बुनियादी यात्री सुविधाओं की कमी को लेकर दक्षिण पश्चिम रेलवे के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। ट्रेन के वॉशरूम में पानी उपलब्ध न होने के कारण एक यात्री को अपने 23 परिजनों के साथ बीच रास्ते में ही यात्रा छोड़नी पड़ी थी। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी करार देते हुए रेलवे को टिकट की मूल राशि वापस करने और मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

मामला अप्रैल 2025 का है, जब शिवमोग्गा निवासी 52 वर्षीय टी. नागेंद्र अपने 20 वयस्क और चार बच्चों समेत 24 सदस्यीय परिवार के साथ आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर दर्शन के लिए गए थे। 15 अप्रैल को तिरुपति से लौटने के बाद परिवार बेंगलुरु के यशवंतपुर स्टेशन पहुंचा, जहां से उन्होंने शिवमोग्गा जाने के लिए ट्रेन के सेकंड क्लास के टिकट खरीदे।

कोच में नहीं था पानी, महिलाओं और बच्चों को हुई भारी परेशानी

ट्रेन के यशवंतपुर से तुमकुर की ओर आगे बढ़ते ही यात्रियों को पता चला कि कोच के वॉशरूम में पानी की बिल्कुल सप्लाई नहीं है। पानी न होने से परिवार की महिलाओं और बच्चों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ा। नागेंद्र ने ट्रेन में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से मदद मांगी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला और उन्हें तुमकुर स्टेशन पर उतरकर शिकायत करने की सलाह दी गई।

परिणामस्वरूप, पूरा परिवार तुमकुर रेलवे स्टेशन पर उतर गया और स्टेशन मास्टर के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद परिवार को शिवमोग्गा पहुंचने के लिए रात को दूसरी ट्रेन से यात्रा करनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त टिकट खरीदने पड़े।

रेलवे का पक्ष और उपभोक्ता आयोग की तल्ख टिप्पणी

यात्री ने पहले रेलवे को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने ₹10 लाख मुआवजे की मांग की। दूसरी तरफ, रेलवे प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि कोच में पानी, बिजली और पंखे जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सामान्य रूप से उपलब्ध थीं।

शिवमोग्गा जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष टी. शिवन्ना और सदस्य बी. डी. योगानंद की पीठ ने टिकट और स्टेशन पर दर्ज शिकायतों की पड़ताल के बाद रेलवे की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि रेलवे यह साबित करने में नाकाम रहा कि कोच में पानी उपलब्ध था। इसके अलावा, यात्रियों की वास्तविक समस्या का समय पर समाधान करने के बजाय प्रशासनिक लापरवाही बरती गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायत छोटी हो या बड़ी, उसका निवारण करना रेलवे की जिम्मेदारी है।

आयोग का आदेश: 45 दिनों में करना होगा भुगतान

आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए रेलवे को निम्न भुगतान करने का निर्देश दिया है:

  • मूल टिकट रिफंड: ₹1,000 की राशि 45 दिनों के भीतर लौटानी होगी। निर्धारित अवधि के बाद इस पर 6% सालाना ब्याज देय होगा।
  • मुआवजा: परिवार को हुई असुविधा और मानसिक परेशानी के लिए ₹10,000 का मुआवजा।
  • मुकदमा खर्च: कानूनी प्रक्रिया के खर्च के रूप में ₹5,000 का भुगतान।

यदि रेलवे 45 दिनों के भीतर मुआवजे और अदालती खर्च का भुगतान नहीं करता है, तो उसे 10% सालाना ब्याज की दर से अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। हालांकि, आयोग ने यात्री द्वारा मांगी गई 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि को अत्यधिक मानते हुए खारिज कर दिया।

Desh Raj
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