Agra News: एमएलसी शिक्षक चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी को हार का सामना करना पड़ा है। सपा प्रत्याशी एमएलसी आकाश अग्रवाल ने मतगणना में जीत दर्ज की। शीर्ष नेतृत्व के कड़े निर्देशों और भारी-भरकम सांगठनिक ढांचे के बावजूद भाजपा पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी परिणाम में साफ नजर आई।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रतिष्ठा का सवाल बने एमएलसी शिक्षक चुनाव में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया गया था कि इस चुनाव के नतीजे उनके कार्य प्रदर्शन के रिपोर्ट कार्ड की तरह देखे जाएंगे। इसके बावजूद मतगणना में भाजपा प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी शुरुआत से ही पीछे रहे और मुकाबला बराबरी तक भी नहीं पहुंच सका। चुनाव में सपा समर्थित एमएलसी प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने बढ़त बनाए रखते हुए जीत हासिल की।
लंबा राजनीतिक अनुभव रखने वाले हरिकिशोर तिवारी के प्रचार के लिए भाजपा ने जिलाध्यक्षों से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपे थे। हालांकि, जमीन पर यह रणनीति मतदाताओं को साधने में पूरी तरह असरदार साबित नहीं हुई।
मतदाताओं से संपर्क के बजाय बैठकों तक सीमित रहे पदाधिकारी
पार्टी पदाधिकारियों ने चुनाव के दौरान दावा किया था कि प्रत्येक 20 मतदाताओं पर एक नेता की तैनाती की गई है और पन्ना प्रमुखों को मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने का लक्ष्य मिला है। शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और विद्यालय प्रबंधकों के सम्मेलन भी आयोजित किए गए। इसके बावजूद पदाधिकारियों की सक्रियता मतदाताओं से सीधे संपर्क करने की जगह कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों तक ही अधिक केंद्रित रही।
जनप्रतिनिधियों में समन्वय का अभाव
क्षेत्र में पार्टी के नौ विधायक, दो लोकसभा सांसद, दो राज्यसभा सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और नगर पंचायत अध्यक्षों का बड़ा प्रतिनिधि ढांचा मौजूद था। पार्टी ने इन सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी थी। मंगलवार को हुई मतगणना में पहले ही दौर से भाजपा प्रत्याशी पिछड़ गए। शुरुआती चरणों के बाद ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चुनावी नतीजों को लेकर निराशा दिखने लगी।
ऐन वक्त पर रद्द हो गई थी मुख्यमंत्री की जनसभा
चुनावी अभियान के तहत भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में 16 अक्टूबर को ताजगंज स्थित टाटा मैदान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा तय की गई थी। इस रैली में शिक्षक मतदाताओं को जुटाने की जिम्मेदारी स्थानीय विधायकों पर थी। कार्यक्रम वाले दिन सुबह हुई बारिश के कारण स्थानीय पदाधिकारियों ने जनसभा को स्थगित कर दिया, जबकि उसी दिन बारिश के बावजूद गाजियाबाद में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय समय पर हुआ था। बाद के दिनों में भी संगठन आगरा में मुख्यमंत्री की सभा का पुनर्गठन नहीं करा सका, जिसका असर अंतिम परिणाम पर पड़ा।