IsLAMABAD News: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में पिछले दो महीनों से जारी उग्र प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने अपने विदेशी लॉबी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है। सरकार का मकसद सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक समुदाय की नजरों से दूर रखना है।
अधिकारी के अनुसार, जिन समूहों का इस्तेमाल दशकों से भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए होता था, अब उन्हें ही पीओके की हिंसा पर पर्दा डालने का जिम्मा सौंपा गया है। प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन अब बिजली दरों और गेहूं सब्सिडी से बढ़कर चुनावी सुधारों और इस्लामाबाद के शासन के विरोध तक पहुंच चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में अब तक लगभग 40 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गायब हैं। क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान विदेशी सांसदों और संगठनों में भारी निवेश करके अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान का मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय फंड हासिल करना और लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से ध्यान भटकाना है। साथ ही, इस्लामाबाद प्रशासन बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की अशांति पर भी पर्दा डालना चाहता है। चीन के भारी निवेश और बुनियादी ढांचों पर हो रहे लगातार हमलों के कारण पाकिस्तान पर बीजिंग का भी भारी दबाव बना हुआ है।