Islamabad News: अमेरिका के राजनीतिक घटनाक्रम और वाशिंगटन से 10 अरब डॉलर की वित्तीय मदद पर अनिश्चितता के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर के ऋण की अवधि बढ़ाकर फौरी राहत दी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सहायता न मिलने की स्थिति में भी देश अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड और आंतरिक वित्तीय अनुशासन के जरिए अपनी जरूरतें पूरी करने में सक्षम है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों और वहां के राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों के बीच पाकिस्तान की 10 अरब डॉलर की आर्थिक मदद की गुहार अधर में लटक गई है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में अब अमेरिका से राहत मिलने की उम्मीद कमजोर दिख रही है। हालांकि, इस वित्तीय संकट के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर के ऋण की अवधि को आगे बढ़ाकर विदेशी मुद्रा भुगतान के मोर्चे पर तात्कालिक राहत प्रदान की है। वित्त मंत्री के अनुसार, यदि अमेरिका से वित्तीय सुविधा मिलती है तो यह सकारात्मक होगा, लेकिन पाकिस्तान इसके बिना भी अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने की तैयारी कर चुका है।
सऊदी अरब से कर्ज विस्तार और विदेशी मुद्रा प्रबंधन
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने पुष्टि की कि सऊदी अरब ने अप्रैल में स्वीकृत 3 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा की समय-सीमा आगे बढ़ा दी है। यह राशि 31 अक्टूबर तक लौटाई जानी थी और शुरुआत में इसे तीन महीने की अवधि के लिए दिया गया था। इस व्यवस्था से पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के करीब 3.5 अरब डॉलर के भुगतान से जुड़े दबाव को संभालने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
औरंगजेब ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब से किसी अतिरिक्त आर्थिक सहायता का अनुरोध नहीं किया है। उनके अनुसार, देश का मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार तीन महीने से अधिक के आयात खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। सरकार की योजना इस वर्ष के अंत तक इसे बढ़ाकर चार महीने के आयात के बराबर पहुंचाने की है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से संसाधन जुटाए जाएंगे।
अमेरिका से 10 अरब डॉलर के प्रस्ताव पर अनिश्चितता
पाकिस्तान ने जुलाई में अमेरिका से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी (ESSF) का अनुरोध किया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सरकार को विदेशी मुद्रा की अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराना था। हालांकि, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के बदले समीकरणों और वहां के नए राजनीतिक रुख के चलते इस प्रस्ताव पर सहमति बनने की संभावना कमजोर पड़ गई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि जुलाई में अमेरिका से वार्ता का प्राथमिक लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान की साख और पहुंच को पुनः स्थापित करना था, जो हासिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि सितंबर में पाकिस्तान द्वारा जारी 3 अरब डॉलर के बॉन्ड के लिए करीब 6 अरब डॉलर के आवेदन मिले थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुविधा मंजूर होने पर पाकिस्तान को अतिरिक्त सहारा मिलेगा, परंतु देश इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के तहत यूरोबॉन्ड, चीनी बाजार में पांडा बॉन्ड और स्थानीय मुद्रा से जुड़े डॉलर भुगतान बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में है।
विदेशी मुद्रा भंडार और सार्वजनिक कर्ज की स्थिति
पाकिस्तान सरकार के अनुसार, कड़े वित्तीय अनुशासन के कारण बजट घाटे और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। ईंधन और गेहूं के आयात पर बढ़े खर्च के बावजूद चालू खाते का घाटा इस वित्त वर्ष जीडीपी के एक प्रतिशत के भीतर रहने का अनुमान है। प्रतिकूल परिस्थितियों और बाढ़ के प्रभावों के बावजूद देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21.5 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है।
वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने सीनेट समिति को प्रस्तुत आंकड़ों में बताया कि जून 2026 के अंत तक पाकिस्तान का सार्वजनिक कर्ज घटकर जीडीपी के 68.6 प्रतिशत पर आ गया है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 75.1 प्रतिशत था। पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक कर्ज की वार्षिक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो बीते 20 वर्षों में सबसे कम स्तर है। अगस्त के अंत तक देश का घरेलू कर्ज 58.8 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये दर्ज किया गया, जबकि विदेशी कर्ज लगभग 98.2 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। पुराने कर्जों के पुनर्वित्त और रोलओवर के बावजूद पाकिस्तान की शुद्ध वित्तीय आवश्यकता करीब 11 अरब डॉलर आंकी गई है, जिसमें से 5 अरब डॉलर का भुगतान चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में पूरा किया जा चुका है और शेष 6 अरब डॉलर का भुगतान अगले सात महीनों में किया जाना है।