पीओके के रावलकोट में डी-चौक बना बड़े जन-आंदोलन का केंद्र, बुनियादी अधिकारों को लेकर भड़का व्यापक विरोध

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Rawalakot News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट स्थित डी-चौक पर बुनियादी अधिकारों, रियायती दरों पर गेहूं और बिजली के भारी बिलों के विरोध में व्यापक जन-आंदोलन जारी है। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं मुजफ्फराबाद के विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं।

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के प्रमुख शहर रावलकोट का डी-चौक इस समय प्रशासन और सुरक्षा बलों के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया है। प्रशासनिक भवनों और मुख्य बाजारों को जोड़ने वाले इस चौराहे पर हजारों नागरिक अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर लगातार डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए की गई बल प्रयोग की कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच भी डी-चौक पर डटे नागरिक

मूल रिपोर्ट और स्थानीय सूचनाओं के अनुसार, रावलकोट में शांतिपूर्ण मांगें उठा रहे प्रदर्शनकारियों पर की गई कड़ी प्रशासनिक और सैन्य कार्रवाई के दौरान कई नागरिकों के हताहत और घायल होने की खबरें सामने आई हैं। रिहायशी क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी और कथित कार्रवाइयों के आरोपों के बावजूद स्थानीय जनता डी-चौक खाली करने को तैयार नहीं है। स्थानीय संगठनों का कहना है कि भय का माहौल बनाकर जनता की वाजिब मांगों को दबाया नहीं जा सकता।

मुजफ्फराबाद में छात्रों का समर्थन, आंदोलन ने पकड़ा जोर

रावलकोट से शुरू हुआ यह असंतोष अब राजधानी मुजफ्फराबाद तक फैल चुका है। यहां के शैक्षणिक संस्थानों—विशेष रूप से चेहला यूनिवर्सिटी और जामिया कश्मीर मुजफ्फराबाद—के छात्र भी नागरिकों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। छात्रों ने जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए प्रदर्शन तेज कर दिया है। छात्रों की मांग है कि सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाई तुरंत रोकी जाए और जनता की सभी लोकतांत्रिक व नागरिक मांगों को बहाल किया जाए।

जेएएसी का 38-सूत्रीय चार्टर और जनता की मुख्य मांगें

पीओके में बढ़ते जन-आक्रोश का मुख्य कारण लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा और आर्थिक संकट है। प्रदर्शनकारी संगठन JAAC ने प्रशासन के समक्ष 38-सूत्रीय मांग पत्र (चार्टर ऑफ डिमांड्स) रखा है। इस आंदोलन की प्रमुख मांगों में स्थानीय स्तर पर उत्पन्न बिजली पर भारी-भरकम बिलों में कटौती, सब्सिडी वाले गेहूं की नियमित आपूर्ति और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय जनता को समुचित अधिकार देना शामिल है। आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

नियंत्रण रेखा के निकट रणनीतिक संवेदनशीलता

रावलकोट शहर नियंत्रण रेखा (LoC) के निकटवर्ती क्षेत्र में स्थित है। अंतरराष्ट्रीय और रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस सीमावर्ती इलाके में हो रही व्यापक उथल-पुथल ने इस्लामाबाद प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान में जारी आंतरिक आर्थिक संकट और मुद्रास्फीति के बीच पीओके में उठ रहे इस सशक्त विरोध को विश्लेषक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं। डी-चौक पर छात्रों, बुजुर्गों और आम नागरिकों का यह जमावड़ा यह संकेत दे रहा है कि क्षेत्र में नीतिगत और व्यवस्थागत सुधारों की मांग अब और तीव्र हो चुकी है।

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