Islamabad News: पाकिस्तान में सेना का दखल अब केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा है। पाकिस्तानी सेना सरकारी संपत्तियों, रियल एस्टेट और देश की न्याय व्यवस्था पर पूरी तरह हावी हो चुकी है। लग्जरी क्लबों से लेकर असंवैधानिक जमीनों तक, सेना राष्ट्रीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण लगातार मजबूत कर रही है।
हाल ही में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के साल 2022 के उस ऐतिहासिक फैसले को चुपचाप पलट दिया गया, जिसमें तीन सौ एकड़ के नेवल प्रोजेक्ट को अवैध माना गया था। सरकारी जमीन पर बने नेवल सेलिंग क्लब को राहत मिलना दर्शाता है कि सेना अदालती आदेशों को कमजोर कर बेशकीमती संपत्तियों पर अपना हक जमा रही है।
विवादित 27वें संविधान संशोधन से सेना प्रमुख को मिली कानूनी छूट
सेना के इस बढ़ते प्रभाव के पीछे पाकिस्तान का विवादित 27वां संविधान संशोधन सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। इस संशोधन के माध्यम से चुनी हुई नागरिक सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय को सौंप दिया गया है। इससे सेना का नागरिक और आर्थिक मामलों पर सीधा हस्तक्षेप स्थापित हो चुका है।
इसके साथ ही सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को आजीवन कानूनी छूट प्रदान कर दी गई है। अब उनके या शीर्ष सैन्य अधिकारियों के किसी भी फैसले को देश की किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इस नए कानून ने पाकिस्तान के लोकतंत्र, न्यायपालिका और पूरी अर्थव्यवस्था पर सेना का एकाधिकार मजबूत कर दिया है।