Delhi News: दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित नेशनल करियर सर्विस सेंटर फार डिफरेंटली एबल्ड (एनसीएससी-डीए) में दिव्यांगजनों के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब शुरू की गई है। यहां 21 मान्यता प्राप्त श्रेणियों के दिव्यांग युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर एप्लीकेशन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के माध्यम से कंपनियों से भी जोड़ा जाएगा।
पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित ‘नेशनल करियर सर्विस सेंटर फार डिफरेंटली एबल्ड’ (एनसीएससी-डीए) में दिव्यांग युवाओं के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब का शुभारंभ किया गया है। मंगलवार को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के रोजगार महानिदेशालय की उप महानिदेशक अंजलि रावत और उप निदेशक अनुपमा शर्मा ने इस लैब का उद्घाटन किया। इस केंद्र में 21 मान्यता प्राप्त दिव्यांग श्रेणियों के युवाओं को एआई, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष बनाया जाएगा, ताकि वे कॉर्पोरेट और तकनीकी जगत में अपना करियर बना सकें।
यह पहल क्वालकॉम कंपनी, निर्माण संगठन और एनसीएससी-डीए के संयुक्त सहयोग से सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) परियोजना ‘समर्थ’ के तहत शुरू की गई है। इस लैब को विशेष रूप से आधुनिक कार्यक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।
आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों से लैस है नई लैब
अधिकारियों ने बताया कि क्वालकॉम के सहयोग से स्थापित इस कंप्यूटर लैब में उच्च स्तरीय तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें प्रशिक्षुओं के अभ्यास के लिए 30 लैपटॉप, 100 इंच का इंटरएक्टिव स्मार्ट बोर्ड, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और अलग-अलग कार्यस्थल (वर्कस्टेशन) तैयार किए गए हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल बुनियादी कंप्यूटर का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की मांग के अनुसार तकनीकी रूप से पूरी तरह कुशल बनाना है। तकनीकी दक्षता के साथ-साथ प्रशिक्षुओं के संवाद कौशल (कम्युनिकेशन स्किल्स) और व्यक्तित्व विकास (पर्सनालिटी डेवलपमेंट) पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेष सहयोगी स्टाफ और संकेत भाषा दुभाषिया की तैनाती
एनसीएससी-डीए केंद्र के प्रमुख गौतम कुमार मुखर्जी ने बताया कि सुनने और बोलने में अक्षम (मूक-बधिर) प्रशिक्षुओं सहित अन्य दिव्यांगों की सहूलियत के लिए विशेष स्टाफ तैनात किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान संवाद और मार्गदर्शन में कोई बाधा न आए, इसके लिए केंद्र में एक सॉफ्ट स्किल ट्रेनर, एक संकेत भाषा दुभाषिया (साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर), एक काउंसलर और दो मोबिलाइजर की नियुक्ति की गई है। यह टीम प्रशिक्षुओं की समस्याओं का समाधान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने का काम करेगी।
रोजगार मेलों के जरिए कंपनियों से जोड़े जाएंगे प्रशिक्षु
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को रोजगार के बेहतर अवसर दिलाने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। केंद्र के पुनर्वास अधिकारी मनोज कालपांडे ने बताया कि तकनीकी और संवाद कौशल सिखाने के साथ-साथ केंद्र में नियमित रूप से रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा।
इन मेलों के माध्यम से प्रशिक्षित दिव्यांग युवाओं को प्रमुख कंपनियों से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरी मिल सके। इस समग्र प्रयास का मकसद दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है।