ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सच्चिदानंद मोहंती का निधन, अकादमिक जगत में शोक

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Koraput News: ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ), कोरापुट के पूर्व कुलपति और जाने-माने शिक्षाविद् प्रो. सच्चिदानंद मोहंती का निधन हो गया है। उनके निधन पर विश्वविद्यालय परिवार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रो. मोहंती एक प्रतिष्ठित अकादमिक विद्वान, साहित्यिक आलोचक और सांस्कृतिक इतिहासकार थे, जिन्होंने शिक्षा और ओड़िया संस्कृति के संवर्धन में अहम योगदान दिया।

ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ), कोरापुट के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद मोहंती के निधन से अकादमिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिवंगत विद्वान को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उच्च शिक्षा के विकास और ओडिशा की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने में उनके योगदान को याद किया।

सीयूओ के विकास में रहा अहम योगदान

प्रोफेसर मोहंती ने अगस्त 2015 से फरवरी 2019 तक ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली थी। सीयूओ में कार्यभार संभालने से पहले वे हैदराबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने वर्ष 1987 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर से अपनी डॉक्टरेट (पीएच.डी.) की उपाधि पूरी की थी।

29 पुस्तकें और 100 से अधिक शोध लेख

एक प्रखर चिंतक और लेखक के तौर पर प्रोफेसर मोहंती ने अंग्रेजी और ओड़िया भाषा में 29 पुस्तकों की रचना की। इसके साथ ही विभिन्न प्रतिष्ठित जर्नल्स में उनके 100 से अधिक शोध लेख प्रकाशित हुए। उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में उत्तर-औपनिवेशिक अध्ययन, सांस्कृतिक अध्ययन, श्री अरविंद दर्शन, जेंडर अध्ययन, यात्रा-वृत्तांत और ओडिशा का सांस्कृतिक इतिहास शामिल रहा।

उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में ‘अर्ली विमेंस राइटिंग इन उड़ीसा, 1898-1950: अ लॉस्ट ट्रेडिशन’, ‘जेंडर एंड कल्चरल आइडेंटिटी इन कोलोनियल उड़ीसा’, ‘श्री अरबिंदो: अ कंटेंपरेरी रीडर’ और ‘पीरियॉडिकल प्रेस एंड कोलोनियल मॉडर्निटी: ओडिशा, 1866-1936’ प्रमुख हैं।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान और प्रशासनिक दायित्व

अकादमिक और साहित्यिक क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया गया। उन्हें फुलब्राइट, ब्रिटिश काउंसिल, चार्ल्स वॉलेस, साल्ज़बर्ग फेलोशिप और कथा पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्होंने यूनेस्को में भारत के शिक्षा आयोग के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

विश्वविद्यालय ने व्यक्त की गहरी संवेदना

प्रोफेसर मोहंती के निधन पर गहरा दुख जताते हुए सीयूओ के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार शासनी ने कहा, “प्रोफेसर सच्चिदानंद मोहंती का निधन अकादमिक एवं बौद्धिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी विशिष्ट विद्वत्ता, उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और ओडिशा की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत में उनके अमूल्य योगदान से हमें निरंतर प्रेरणा मिलती रहेगी।”

विश्वविद्यालय प्रशासन और संकाय सदस्यों ने प्रोफेसर मोहंती के शोकसंतप्त परिवार, सहकर्मियों, शोधार्थियों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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