New Delhi News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लगातार बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए गूगल अब डेटा सेंटर अंतरिक्ष में ले जाने की योजना बना रहा है। अमेरिकी टेक दिग्गज कंपनी अपने नए प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत स्पेस ऑर्बिट में एआई डेटा प्रोसेसिंग क्षमताओं का व्यापक परीक्षण शुरू करने वाली है।
प्रोजेक्ट सनकैचर और स्पेसएक्स रॉकेट से होगी लॉन्चिंग
इस प्रोजेक्ट के तहत पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहे सैटेलाइट्स में गूगल की आधुनिक ट्रिलियम टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएगी। कंपनी आगामी महीने में अपना पहला ऑर्बिटल टेस्ट पूरा करने जा रही है। 1 अक्टूबर को स्पेसएक्स रॉकेट के जरिए प्रोटोटाइप सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया जाएगा।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि अंतरिक्ष के शून्य में एआई कंप्यूटिंग को सुरक्षित और व्यावहारिक ढंग से कैसे संचालित किया जाए। स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य में कंप्यूटिंग का पूरा काम अंतरिक्ष में शिफ्ट हो सकता है।
धरती के मुकाबले आठ गुना अधिक मिलेगी सौर ऊर्जा
गूगल के अनुसार लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स को लगातार सूर्य का सीधा प्रकाश मिलता रहता है। कंपनी का अनुमान है कि इससे वे जमीन पर स्थित डेटा सेंटर्स की तुलना में आठ गुना तक अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। यह तकनीक बिजली और जमीन जैसी गंभीर समस्याओं का टिकाऊ विकल्प बनेगी।
अंतरिक्ष में एआई चिप्स के सुरक्षित संचालन में रेडिएशन और तापमान नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। गूगल ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की न्यूक्लियर लैबोरेटरी में चिप्स का रेडिएशन टेस्ट पूरा कर लिया है। कंपनी 2027 में दो सैटेलाइट्स के बीच लेजर संचार तकनीक का भी परीक्षण करेगी ताकि डेटा आसानी से साझा हो सके।