New Delhi News: प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों का एक विशेष जांच पैनल बनाएगा। यह पैनल दागी और विभागीय जांच का सामना कर रहे अधिकारियों के मामलों की निष्पक्ष जांच करेगा।
मंत्रालय के अनुसार इस पैनल में शामिल होने के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 तय की गई है। इच्छुक अधिकारियों की अधिकतम उम्र सीमा 65 साल रखी गई है। आवेदक का मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ-साथ उसका विजिलेंस रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग और निष्कलंक होना जरूरी है।
तीन साल होगी पैनल की वैधता, 180 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
इस जांच पैनल की वैधता तीन साल की रहेगी। नियुक्त किए गए अधिकारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा भी की जाएगी। अधिकारियों को नियुक्ति के 180 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी का शिकायतकर्ता या गवाहों से कोई संबंध नहीं होना चाहिए।
सर्कुलर के तहत जांच में तेजी लाने और यात्रा खर्च में कटौती करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। जांच अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया के दौरान उच्च स्तरीय गोपनीयता बनाए रखनी होगी। किसी भी प्रकार के हितों के टकराव से बचने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
गवाहों की संख्या के आधार पर तय होगा जांच अधिकारियों का मानदेय
जांच अधिकारियों की फीस चार्जशीट में दर्ज गवाहों की संख्या पर निर्भर करेगी। 10 से ज्यादा गवाह होने पर बेसिक पेंशन का 90 फीसदी और छह से 10 गवाहों पर 70 फीसदी मानदेय मिलेगा। वहीं छह से कम गवाहों पर यह दर 60 प्रतिशत तय की गई है।
आउटस्टेशन यात्रा के लिए प्रति केस 40 हजार रुपये ट्रांसपोर्ट अलाउंस और सचिवीय मदद के लिए 20 से 40 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इसके अलावा सेवारत अधिकारियों को पार्ट-टाइम जांच अधिकारी बनने पर 15 फीसदी और प्रेजेंटिंग ऑफिसर को बेसिक पे का 20 फीसदी मानदेय देने का प्रावधान है।