यूपी विधानसभा चुनाव 2027: यूजीसी विवाद और आंतरिक खींचतान के बीच पूर्वांचल दौरे पर भाजपा अध्यक्ष

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Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 4 और 5 नवंबर को दो दिवसीय सांगठनिक दौरे पर गोरखपुर पहुंचे हैं। हालिया शिक्षक एमएलसी चुनावों में सामने आए यूजीसी विरोध, प्रयागराज की घटना और पार्टी के भीतर उठे असंतोष के बाद यह दौरा पूर्वांचल के सामाजिक समीकरणों को साधने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सांगठनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन दो दिवसीय संगठनात्मक प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे हैं। इस दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश नेतृत्व के साथ मिलकर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह यात्रा महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से शुरू होकर गोलघर स्थित माता काली मंदिर और सरदार पटेल की प्रतिमा तक निकाली जाएगी। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था और विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे राजनीतिक माहौल का मुकाबला करना है।

पदयात्रा के अतिरिक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एनेक्सी भवन में प्रबुद्ध वर्ग के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और शाम को उत्तर प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होंगे। बंद कमरे में होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के साथ पूर्वांचल के राजनीतिक व सामाजिक परिदृश्य पर मंथन किया जाएगा।

शिक्षक एमएलसी चुनाव में दिखा था नीतिगत विरोध

यह सांगठनिक दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान मतपत्रों पर मतदाताओं द्वारा ‘UGC Roll Back’ लिखकर विरोध दर्ज कराने का मामला सामने आया था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और नीतियों को लेकर सामान्य वर्ग के युवाओं व शिक्षकों में असंतोष की बात कही जा रही थी। मतपत्रों पर प्रत्याशियों को वोट देने के बजाय विरोध दर्ज कराने की इस प्रवृत्ति को राजनीतिक विश्लेषक पार्टी के पारंपरिक जनाधार के बीच उपजी नाराजगी के रूप में देख रहे हैं।

प्रयागराज की घटना और पार्टी के भीतर बयानबाजी

इस नीतिगत असंतोष के बीच प्रयागराज के ‘प्रबुद्ध महाकुंभ’ कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के संबोधन के दौरान यूजीसी के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले युवक के साथ स्थानीय भाजपा पार्षद द्वारा मारपीट का मामला सामने आया था। इस घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद दारागंज थाने में संबंधित पार्षद के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

इसके तुरंत बाद प्रयागराज शहर उत्तरी से भाजपा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी के पार्षद के आचरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यूजीसी की नीतियों का विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और अपनों के खिलाफ हिंसा करने वालों की तुलना इतिहास के नकारात्मक पात्रों से की। एक सत्तारूढ़ विधायक द्वारा पार्टी पदाधिकारी के खिलाफ सार्वजनिक रुख अपनाने से स्थानीय स्तर पर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई।

पूर्वांचल में पीडीए बनाम सामाजिक संतुलन की चुनौती

पूर्वांचल की राजनीति में गोरखपुर और वाराणसी जहां भाजपा के मजबूत केंद्र माने जाते हैं, वहीं आजमगढ़, गाजीपुर और अंबेडकरनगर जैसे जिलों में समाजवादी पार्टी का प्रभाव रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला भाजपा के सामने सामाजिक गठबंधन की नई चुनौती पेश कर रहा है।

हालिया विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के चुनाव में भी मुकाबला कड़ा रहा, जहां भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने वाराणसी की शिक्षक व स्नातक और लखनऊ की स्नातक सीट पर कब्जा जमाया था, जबकि भाजपा ने चार शिक्षक और दो स्नातक सीटें हासिल की थीं।

संगठनात्मक संवाद से संतुलन साधने का प्रयास

इन परिस्थितियों के बीच भाजपा ने राज्य के छह क्षेत्रों में पदयात्राओं, युवा सम्मेलनों और किसान संवाद कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। गोरखपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी, पुराने कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क और कोर कमेटी की रणनीतिक चर्चा का मुख्य उद्देश्य संगठन को एकजुट रखना और हालिया विवादों से उपजे असंतोष को शांत करना है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए अपने पारंपरिक जनाधार को जोड़े रखते हुए सामाजिक संतुलन साधना सबसे प्रमुख कार्य बना हुआ है।

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