New Delhi News: दिल्ली में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की शक्ति जनता के वोट में है, हिंसा या तख्तापलट के नारों में नहीं।
दिल्ली में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट की मांग को लेकर हुए हालिया प्रदर्शनों के बीच सुन्नी सूफी संगठन ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ‘रिजीम चेंज’, ‘तख्तापलट’ और भारत की तुलना बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसे देशों से करने वाले नारों का किसी भी रूप में समर्थन नहीं करते हैं। मौलाना ने इन मांगों को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
मौलाना रजवी ने कहा कि भारत एक मजबूत और परिपक्व लोकतांत्रिक देश है, जहां सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल जनता के पास अपने मताधिकार के जरिए सुरक्षित है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार की नीतियों से असहमति जताना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, हिंसा का सहारा लेकर या तख्तापलट की मांग उठाकर सत्ता बदलने की कोशिश किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
विदेशी ताकतों की संलिप्तता की आशंका और जांच की मांग
प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने आशंका जताई कि देश के भीतर अशांति फैलाने और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के पीछे कुछ विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। जांच के माध्यम से उन चेहरों को बेनकाब किया जाना चाहिए जो देश की साझा संस्कृति को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
मौलाना ने दावा किया कि कुछ बाहरी लोग यहां आकर नारेबाजी और प्रदर्शन करने के बाद वापस चले गए अथवा अब शांत बैठ गए हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे तत्वों की शिनाख्त कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आगाह किया कि देश की शांति, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की किसी भी साजिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पर्दे के पीछे से इस प्रकार के उपद्रव को शह देने वाले तत्वों को चेतावनी देते हुए कहा कि विरोध दर्ज कराने की अपनी मर्यादा होती है। लोकतांत्रिक मूल्यों के भीतर रहकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना जनता का हक है, लेकिन तख्तापलट जैसी राजनीति की देश में कोई जगह नहीं है।