Mumbai News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने के आरोपी पार्षद रमेश म्हात्रे को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और मौजूदा जांच अधिकारी को हटाकर डीसीपी रैंक के अधिकारी को जांच सौंपने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुघे और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच कर रही थी। म्हात्रे को घटना के बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। हालांकि high court ने 18 जुलाई को उनकी बेल रद्द कर दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने जनप्रतिनिधियों के इस तरह के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।
जनप्रतिनिधि होकर जनता और डॉक्टरों पर हमला करना बेहद शर्मनाक
जस्टिस घुघे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पब्लिक लाइफ में रहने वाले लोग जनता की सेवा का वादा करके वोट मांगते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही लोग आम जनता और डॉक्टरों के सिर फोड़ने लगते हैं। जमानत मिलने के बाद अस्पताल के गेट पर समर्थकों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाना बेहद हैरान करने वाला और निराशाजनक व्यवहार है।
म्हात्रे के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि ब्लड प्रेशर बढ़ जाने की वजह से पार्षद को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस पर बेंच ने कहा कि घटना के समय म्हात्रे इतने जोश में थे कि उन्होंने एक महिला डॉक्टर को थप्पड़ मारा और फोन छीन लिया। उस समय उनका समय बहुत कीमती था और उन्होंने हमला करने में एक सेकंड भी नहीं गंवाया।
मामले में दस और गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी
मुख्य लोक अभियोजक शिशिर हिराए ने अदालत को सूचित किया कि दो वरिष्ठ अधिकारियों और तीन नर्सों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस केस में लगभग 10 और गवाहों के बयान दर्ज होने अभी बाकी हैं। पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता के साथ जांच को आगे बढ़ा रही है ताकि सभी तथ्य सामने आ सकें।
पीड़ित डॉक्टर वैभव सालुंखे और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वकीलों ने कहा कि डॉक्टर लगातार डर के साये में काम कर रहे हैं। जिस महिला डॉक्टर के साथ मारपीट हुई थी, उन्हें लगातार धमकी भरे कॉल और मैसेज मिल रहे हैं। दूसरी तरफ म्हात्रे के वकील का कहना था कि कोर्ट के सख्त आदेश से समाज में एक कड़ा संदेश गया है।