किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना: छह दशक पुराने जल विवाद पर छह राज्यों के बीच समझौते की तैयारी पूरी

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New Delhi News: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के लिए जल वितरण समझौते को 15 सितंबर को अंतिम रूप दिया जाएगा। छह राज्यों के बीच करीब छह दशक से अटका यह अंतरराज्यीय जल विवाद अब सुलझने जा रहा है।

इससे पहले 15 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री जल बंटवारे के प्रस्ताव पर सहमत हुए थे। अब जल शक्ति भवन में नई दिल्ली में बैठक होगी। इसमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के शीर्ष अधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

इस समझौते के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलेगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी देने का प्रस्ताव है। यह परियोजना कई राज्यों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के साथ आपसी तालमेल को भी मजबूत करेगी।

अंतरराज्यीय नदियों के पानी को लेकर राज्यों के बीच काफी समय से मतभेद चल रहे हैं। किसाऊ परियोजना का यह नया समझौता विवाद सुलझाने का एक बेहतर मॉडल बनेगा। इससे दिल्ली और हरियाणा सहित अन्य पड़ोसी राज्यों को अतिरिक्त पानी मिलने से बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

छह दशकों की देरी के कारण इस प्रोजेक्ट की निर्माण लागत काफी बढ़ गई है। अब इसकी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो पहले आधी थी। इस ऐतिहासिक समझौते से बांध निर्माण के काम में तेजी आएगी और जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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