Delhi News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नीट यूजी री-एग्जाम के नतीजों को चुनौती देने वाली चार छात्रों की याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति एनबी सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति एडी शिंदे की औरंगाबाद पीठ ने बिना किसी ठोस आधार के आरोप लगाने के लिए प्रत्येक याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
उप सॉलिसिटर जनरल अजय तलहार ने जानकारी दी कि जब हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कोई राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया, तो दो छात्रों ने अपनी याचिकाएं वापस ले लीं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि रिजल्ट में दिख रहे अंक उनके प्रदर्शन से मेल नहीं खा रहे हैं।
ओएमआर शीट की जांच में सही पाए गए एनटीए के अंक
अदालत ने 23 जुलाई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को मूल उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने का निर्देश दिया था। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की उपस्थिति में मूल ओएमआर पुस्तिकाओं की जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि एनटीए द्वारा दिए गए अंक उत्तर पुस्तिकाओं से पूरी तरह मेल खाते हैं।
मई में आयोजित नीट परीक्षा में धांधली की बातें सामने आने के बाद जून में यह री-एग्जाम आयोजित किया गया था। ऋचा देशपांडे, सोहम गावटे, अथर्व जगताप और राहुल अरुणा नाग ने अदालत से उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन की मांग की थी, जिसे जांच के बाद अदालत ने खारिज कर दिया।
एक ही पैनल को काम देने से गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, नीट-यूजी 2026 में प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद का काम एक ही समूह को सौंपे जाने से परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हुई। सीबीआई ने इस संबंध में अनौपचारिक रूप से एनटीए को जानकारी दे दी है। अधिकारियों के मुताबिक यह गड़बड़ी 2024 की अनियमितताओं से काफी अलग थी।
एनटीए ने 2024 की जांच के बाद सीबीआई के सुरक्षा सुझावों को 2025 और 2026 की परीक्षाओं में लागू किया था, जिससे कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। हालांकि, प्रश्नपत्र तैयार करने और मराठी में अनुवाद करने वाले पैनल के शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने सवाल याद कर अपने चुनिंदा ट्यूशन छात्रों को बता दिए थे।