लोकसभा में बिल पास होने से UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज का रास्ता साफ, फिलहाल आम जनता के लिए सेवा पूरी तरह मुफ्त रहेगी

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Delhi News: रोजाना यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट करने वाले उपभोक्ताओं के लिए संसद से बड़ी खबर आई है। लोकसभा में एक नया बिल पास हुआ है, जो भविष्य में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ करता है। हालांकि, मौजूदा समय में आम लोगों के लिए यह सर्विस पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त रहेगी।

संसद द्वारा पारित इस नए कानून से सरकार को जरूरत पड़ने पर चुनिंदा डिजिटल पेमेंट सेवाओं पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल गया है। फिलहाल सरकार ने आम जनता पर कोई नया चार्ज नहीं थोपा है। इस कानूनी बदलाव का मुख्य उद्देश्य सरकार को भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट तय करने का अधिकार देना है।

डिजिटल लेनदेन में इस्तेमाल होने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट या एमडीआर वह शुल्क है, जिसे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां लेती हैं। इससे पहले यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड पर जीरो एमडीआर पॉलिसी लागू थी। इस व्यवस्था के कारण दुकानदारों और व्यापारियों से भी किसी तरह का सर्विस शुल्क नहीं लिया जाता था।

नए कानून के लागू होने के बाद सरकार स्थिति और जरूरत के अनुसार इस शुल्क व्यवस्था में आवश्यक बदलाव कर सकती है। इस नीतिगत निर्णय से आम जनता के आर्थिक बजट पर फिलहाल कोई तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए शुल्क से जुड़ा कोई नया फैसला अभी लागू नहीं हुआ है।

भविष्य में यदि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू किया जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव दुकानदारों और पेमेंट कंपनियों पर पड़ेगा। कुछ विशेष परिस्थितियों में इसका असर आम ग्राहकों की जेब पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम व्यवस्था पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा भविष्य में लिए जाने वाले नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी।

정부가 इन बदलावों के पीछे डिजिटल पेमेंट सिस्टम के तेजी से बढ़ते नेटवर्क और परिचालन लागत को मुख्य वजह बताया है। सिस्टम के तेजी से विस्तार के कारण बैंकों और तकनीकी कंपनियों का मेंटेनेंस खर्च काफी बढ़ गया है। यह नया कानून सरकार को परिस्थिति के अनुरूप नियम और नीतियां बनाने की पूरी छूट प्रदान करता है।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि सभी प्रकार के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाना अनिवार्य नहीं है। आने वाले समय में केवल बड़े भुगतानों या विशेष प्रकार के व्यावसायिक ट्रांजैक्शन पर ही एमडीआर लागू किया जा सकता है। छोटे लेनदेन और आम लोगों के रोजमर्रा के पेमेंट पहले की तरह ही निशुल्क बने रह सकते हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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