Dehradun News: किशाऊ बांध परियोजना पर आठ दशक लंबा इंतजार खत्म होने से मंगलवार को छह राज्यों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन के मौके पर उत्तराखंड को बड़ी सौगात मिली है। इससे राज्य में बिजली संकट से स्थायी राहत मिलने की राह आसान हो गई है।
यह बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनेगी। छह साझेदार राज्यों में शामिल उत्तराखंड को इसके बिजली घटक से काफी फायदा होगा। इससे कृषि और उद्योग क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें आसानी से पूरी होंगी और गर्मियों में बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
यमुना बेसिन में जल प्रबंधन मजबूत होने से सिंचाई और पीने के पानी की व्यवस्था बेहतर होगी। राहत की बात यह है कि जल घटक की लागत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उत्तराखंड पर नहीं पड़ेगा। राज्य को कुल 1476 मिलियन यूनिट बिजली का 50 फीसदी हिस्सा मिलना तय किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लगातार पैरवी से यह परियोजना आगे बढ़ सकी है। बीते जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली बैठक में धामी ने राज्य का पक्ष रखा था। इसके बाद सभी छह राज्यों के बीच मंगलवार को ऐतिहासिक सहमति बनी।
नई डीपीआर के तहत बांध की ऊंचाई 232.6 मीटर रखी गई है। जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता 1561.91 एमसीएम और अतिरिक्त भंडारण 237.81 एमसीएम होगा। प्रोजेक्ट की कुल स्थापित बिजली क्षमता 422 मेगावाट होगी। इससे लगभग 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा भी विकसित की जा सकेगी।