Chennai News: तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) में गड़बड़ी का दावा करते हुए इसे तत्काल रद्द करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी है। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन किया।
चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में शनिवार, 17 अक्टूबर को डीएमके संसदीय दल की अहम बैठक हुई। पार्टी अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में चार प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें चुनाव आयुक्त को हटाने, प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता जताने, विपक्षी दलों के दोहरे रवैये पर सवाल उठाने और मतपत्र प्रणाली लागू करने की बात शामिल रही।
एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल, मानसून को बताया बड़ी बाधा
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके ने जुलाई 2025 में भी मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध किया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिहार में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। स्टालिन ने उस दौरान कनिमोझी करुणानिधि के साथ मिलकर बिहार में मतदाता अधिकार यात्रा में भागीदारी की थी और इस पूरी व्यवस्था पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
पार्टी का कहना है कि जब चुनाव आयोग ने तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में यह प्रक्रिया लागू करने की घोषणा की, तब भी स्टालिन ने चिंता जताई थी। डीएमके ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा नवंबर और दिसंबर के महीनों में भारी मानसून तथा त्योहारों का हवाला देकर सांसदों ने संसद में भी इस पर निरंतर सवाल खड़े किए थे।
