Chamba News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चंबा मेडिकल कॉलेज को अत्याधुनिक सुविधाओं से मजबूत करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को एम्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। अब स्थानीय मरीजों को 3-टेस्ला एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
चंबा मेडिकल कॉलेज में शुरू होंगी 3-टेस्ला एमआरआई और सीटी स्कैन सुविधाएं
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार चंबा मेडिकल कॉलेज में जल्द ही 3-टेस्ला एमआरआई, सीटी स्कैन और आधुनिक एक्स-रे सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन नई मशीनों के लगने से गंभीर बीमारियों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो सकेगी। स्थानीय जनता को अब बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
राज्य सरकार पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को पहली प्राथमिकता दे रही है। चंबा जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में इन अत्याधुनिक जांच सुविधाओं का विस्तार लोगों के लिए बड़ी राहत बनेगा। सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को उसके घर के पास ही विश्वस्तरीय इलाज मिले।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए नियमों में दी जाएगी छूट
मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश सरकार विशेष कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर नियमों में ढील देकर भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया आसान की जाएगी। इससे अस्पताल में कुशल चिकित्सकों की कमी को दूर करने में बड़ी मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य चंबा मेडिकल कॉलेज को एक सशक्त और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी से जहां मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, वहीं मेडिकल छात्रों को भी बेहतरीन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का माहौल मिलेगा। इससे संस्थान के शैक्षणिक स्तर में भी बड़ा सुधार आएगा।
प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। नए चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना से स्थानीय लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा। सरकार आने वाले समय में राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी इसी तरह की सुविधाएं बढ़ाने पर काम कर रही है।
चंबा मेडिकल कॉलेज में प्रस्तावित ये नए सुधार क्षेत्र की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का कायाकल्प करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माने जा रहे हैं। इन प्रयासों से दूर-दराज के मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा, साथ ही उन्हें अपने जिले में ही उच्च स्तरीय चिकित्सा परामर्श और उपचार की सुविधा मिल सकेगी।