Haryana News: हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अंबाला में बनकर तैयार हुए ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ के उद्घाटन कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। अमित शाह 5 नवंबर को इस ऐतिहासिक स्मारक का लोकार्पण करेंगे, जिसके बाद 6 नवंबर से इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट कर अंबाला में स्थापित ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ के लोकार्पण समारोह से जुड़े सभी प्रबंधों पर चर्चा की। इस दौरान विज ने गृह मंत्री को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला की ऐतिहासिक भूमिका और इस परियोजना की विशिष्टताओं से अवगत कराया। बैठक में विज ने अमित शाह को एक विशेष वीडियो भी दिखाया, जिसमें स्मारक की भव्यता, आधुनिक दीर्घाओं और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को दर्शाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला पहुंचकर इस राष्ट्रीय स्मारक को देश को समर्पित करेंगे। इसके अगले दिन यानी 6 नवंबर से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए स्मारक के द्वार खोल दिए जाएंगे।
22 एकड़ में 800 करोड़ की लागत से तैयार हुआ आधुनिक परिसर
अंबाला-दिल्ली जीटी रोड पर करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला यह भव्य स्मारक प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को समर्पित है। हरियाणा सरकार के अनुसार इस परियोजना पर करीब 800 करोड़ रुपये की लागत आई है, जबकि शुरुआती चरण में इसका अनुमानित बजट करीब 261 करोड़ रुपये था।
स्मारक परिसर में कुल 23 अत्याधुनिक गैलरी तैयार की गई हैं। इनमें अंबाला, मेरठ, झांसी और दिल्ली के कश्मीरी गेट सहित क्रांति के प्रमुख केंद्रों और घटनाओं को डिजिटल माध्यम से सहेजा गया है। परिसर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे जैसे महान क्रांतिकारियों की संघर्षगाथा के साथ-साथ कई गुमनाम नायकों के योगदान को भी प्रमुखता दी गई है। दर्शकों के अनुभव को जीवंत बनाने के लिए यहां 360-डिग्री इमर्सिव प्रोजेक्शन, ड्युअल स्क्रीन वाटर शो, लाइट एंड साउंड तकनीक के साथ 206 फुट ऊंचा स्मारक टावर और 210 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज की व्यवस्था की गई है।
1857 की क्रांति में अंबाला की भूमिका के ऐतिहासिक प्रमाण
स्मारक की प्रमुख विशेषताओं में वे ब्रिटिश दस्तावेज और टेलीग्राफ संदेश शामिल हैं, जो यह साबित करते हैं कि 10 मई 1857 को मेरठ में विद्रोह भड़कने से कुछ घंटे पहले ही सुबह अंबाला कैंट में क्रांति की चिंगारी सुलग चुकी थी।
प्रदर्शित ऐतिहासिक अभिलेखों में तत्कालीन अंबाला उपायुक्त द्वारा पंजाब के मुख्य आयुक्त सर जॉन लॉरेंस को भेजा गया इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ संदेश प्रमुख है। इसमें 60वीं और 5वीं रेजिमेंट के देशी सैनिकों के हथियारों के साथ परेड ग्राउंड में लामबंद होने की पुष्टि की गई थी।
अनिल विज के दीर्घकालिक प्रयासों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
अंबाला कैंट से सातवीं बार विधायक निर्वाचित हुए और मौजूदा नायब सिंह सैनी सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अनिल विज पिछले कई दशकों से अंबाला की इस ऐतिहासिक भूमिका को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पैरवी करते रहे हैं। विज के लिए इस स्मारक का लोकार्पण उनके पांच दशक से अधिक के सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।