Haryana News: सेक्टर-20 स्थित संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ हुई गंभीर मारपीट के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए रविवार शाम स्कूल की प्रिंसिपल नीलू कत्याल को निलंबित कर दिया। इससे पहले दो जेबीटी शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है और पुलिस ने प्रबंधन व कर्मचारियों पर लापरवाही का केस दर्ज किया है।
सेक्टर-20 स्थित संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मासूम छात्रा के साथ हुई बर्बरता और सुरक्षा में गंभीर चूक के बाद शिक्षा विभाग ने रविवार शाम प्रिंसिपल नीलू कत्याल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए। इससे पहले शनिवार देर रात दो जेबीटी शिक्षिकाओं, पूजा रानी और सिमरनजीत कौर को भी निलंबित किया गया था। वहीं, पुलिस ने इस गंभीर मामले में स्कूल की प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है।
कमरे में ले जाकर ईंट और लातों से किया हमला
दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, घटना 28 अक्टूबर को दोपहर 3 से 4 बजे के बीच की है। आरोप है कि तीसरी कक्षा के आठ वर्षीय छात्र ने पहली कक्षा की छह साल की बच्ची को स्कूल की पहली मंजिल पर स्थित एक खाली कमरे में ले जाकर बुरी तरह पीटा। छात्र ने बच्ची का सिर बेंच पर पटका और चेहरे तथा सिर पर ईंट व लातों से कई वार किए।
हमले के बाद लहूलुहान अवस्था में बच्ची करीब दो घंटे तक बंद कमरे में पड़ी रही। स्कूल की छुट्टी होने के बाद जब बच्ची अपनी निर्धारित कक्षा में नहीं मिली, तब भी किसी स्टाफ सदस्य या कर्मचारी ने ऊपरी मंजिल के कमरों में जाकर तलाश करने की जहमत नहीं उठाई।
सीसीटीवी लगे होने के बाद भी नहीं मिली समय पर जानकारी
बच्ची के चाचा द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि स्कूल के प्रत्येक कमरे और गैलरी में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनका सीधा डिस्प्ले प्रिंसिपल के कार्यालय में भी मौजूद है। इसके बावजूद इतनी बड़ी वारदात और बच्ची के घंटों घायल पड़े रहने की जानकारी प्रबंधन को समय रहते नहीं मिल सकी।
शिकायतकर्ता ने स्कूल प्रशासन, प्रबंधन, क्लास इंचार्ज और चौकीदार को इस भारी लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है।
तीन दिन बाद दर्ज हुई प्राथमिकी, जांच अधिकारी नियुक्त
बच्ची की गंभीर हालत के चलते पिता उसके उपचार में लगे रहे, जिसके कारण चाचा ने शनिवार शाम करीब 6:30 बजे सेक्टर-20 थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) 2015 की धारा 75 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125(बी) के तहत मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी में देरी के कारणों का कॉलम खाली रखा गया है। मामले की आगे की जांच जुवेनाइल ऑफिसर सुरेश पाल को सौंपी गई है, जबकि एएसआई प्रदीप को जांच अधिकारी बनाया गया है।
आरोपी छात्र को भेजा गया बाल सुधार गृह
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी छात्र के हिंसक व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें आ चुकी थीं, जिस पर शिक्षकों ने उसके अभिभावकों को चेतावनी दी थी। घटना वाले दिन छात्र ने कथित रूप से पहले बच्ची से शरारत की थी। बच्ची द्वारा उसे पागल कहने और शिकायत करने की बात कहने पर छात्र ने उसे बहाने से यह कहकर पहली मंजिल पर बुलाया कि उसके पिता वहां खड़े हैं। बच्ची जब कमरे में पहुंची तो उस पर हमला कर दिया गया। पुलिस पूछताछ में भी छात्र ने चिढ़ाने पर हमला करने की बात स्वीकार की है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेशी के बाद छात्र को अंबाला स्थित ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है।
स्कूल स्टाफ पर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के आरोप
घटना सामने आने के बाद अन्य अभिभावकों ने भी स्कूल के आंतरिक माहौल और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान स्टाफ बच्चों पर ध्यान देने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग और खान-पान में व्यस्त रहता है। घटना वाले दिन भी कुछ महिला शिक्षिकाओं पर अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहने और प्रिंसिपल के अनुपस्थित होने का आरोप लगाया गया है। 31 अक्टूबर को स्कूल के बाहर परिजनों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। तीन शिक्षकों के निलंबन और एफआईआर के बाद अब अभिभावक स्कूल परिसर में बच्चों की पुख्ता सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हैं।