Delhi News: दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में पुलिस अधिकारी छात्र-छात्राओं के साथ बदसलूकी और मारपीट करते दिख रहे हैं। मुख्यधारा के मीडिया में इन घटनाओं को जगह नहीं मिलने से अब सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर चर्चा तेज हो गई है।
संसद भवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के कई दृश्य सामने आए हैं। एक वायरल वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी छात्रा को थप्पड़ मारते नजर आए। वहीं दूसरे वीडियो में पुलिसकर्मी उत्पीड़न करते दिखे। इसके अलावा सादे कपड़ों में डंडे लिए पुरुष और पुलिस वाहन को पलटते दृश्य भी रिकॉर्ड हुए हैं।
मुख्यधारा मीडिया की अनदेखी से बढ़ा जनता का गुस्सा
टीवी समाचार चैनलों और बड़े समाचार पत्रों ने इन गंभीर घटनाओं को प्रमुखता से नहीं दिखाया। गोदी मीडिया कहे जाने वाले टीवी चैनलों की इस अनदेखी से जनता में भारी नाराजगी है। लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन उपवास और छात्र आंदोलन की खबरों को मुख्यधारा के मीडिया ने दबाने का प्रयास किया।
मुख्यधारा के मीडिया द्वारा बनाई गई दूरी के बीच सोशल मीडिया ने सूचना देने का काम संभाला। कई युवा नागरिक पत्रकारों ने केवल मोबाइल फोन के जरिए ग्राउंड से सीधी रिपोर्टिंग की। हालांकि कुछ प्रमुख समाचार पत्रों ने पुलिस लाठीचार्ज के बजाय छात्रों द्वारा पत्थर फेंकने की खबरें ही अपने पन्नों पर छापी थीं।
पेपर लीक और छात्र असंतोष पर संवाद की जरूरत
प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में यह आंदोलन इंटरनेट से शुरू हुआ था। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन देश के कई बड़े शहरों में फैल गया। इस स्वतःस्फूर्त आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल का हाथ नहीं था। यदि सरकार समय पर छात्रों से बातचीत करती तो स्थिति काफी संभल सकती थी।
आज के समय में सोशल मीडिया की पहुंच टीवी चैनलों से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने में मदद मिली है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में फर्जी सामग्री से सावधान रहना जरूरी है। सरकार को पुलिस की सभी ज्यादतियों पर संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।