Delhi News: भारत में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे अधिकांश लोगों ने नकदी रखना बंद कर दिया है। कैशलेस व्यवस्था से सुविधाएं जरूर बढ़ी हैं, लेकिन सर्वर डाउन होने या नेटवर्क न मिलने पर भारी परेशानी हो सकती है। इसलिए आपात स्थिति से निपटने के लिए हर व्यक्ति को जेब में थोड़ा कैश हमेशा रखना चाहिए।
आजकल यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान करना काफी आसान और सुविधाजनक हो गया है। हालांकि, जब आप कहीं बाहर हों और अचानक इंटरनेट बंद हो जाए, तो स्थिति बिगड़ सकती है। छोटे दुकानदारों, ऑटो चालकों और पार्किंग का भुगतान करने के लिए पास में नकदी होना बहुत जरूरी है, वरना आप अचानक परेशानी में फंस सकते हैं।
ऑनलाइन पेमेंट के दौरान आ सकती हैं ये बड़ी तकनीकी समस्याएं
डिजिटल लेन-देन करते समय अक्सर तकनीकी खामियां सामने आती हैं। मोबाइल की बैटरी खत्म होना, फोन का नेटवर्क चले जाना या डेटा समाप्त हो जाना आम बात है। इसके अलावा बैंक सर्वर डाउन होने या स्क्रीन खराब होने से भी भुगतान अटक जाता है। ऐसी अचानक आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए जेब में नगद पैसे होना ही समझदारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति को अपनी जेब में कम से कम 500 रुपये कैश जरूर रखने चाहिए। यह रकम किसी भी आपात स्थिति में आपके एक दिन के बुनियादी खर्चों को आसानी से पूरा कर सकती है। आप अपनी यात्रा की दूरी और दिनभर की जरूरतों के हिसाब से इस राशि को थोड़ा बढ़ा भी सकते हैं।
दैनिक खर्चों के अनुसार इस तरह करें अपने कैश की सही प्लानिंग
अगर आप ऑफिस जा रहे हैं, तो नाश्ते, लंच और स्नैक्स के खर्च का आकलन कर लें। घर से स्टेशन तक ई-रिक्शा और ऑटो का किराया नगद देना पड़ सकता है। भले ही कई ऑटो वाले यूपीआई लेते हों, लेकिन सभी के पास यह सुविधा होना जरूरी नहीं है। इसलिए आने-जाने के किराए के लिए अलग से कैश रखना चाहिए।
एक उदाहरण से समझें, यदि ऑफिस आने-जाने का रिक्शा किराया 100 रुपये है और दोपहर के खाने का खर्च 150 रुपये आता है। इसके अलावा चाय और स्नैक्स के लिए 100 रुपये चाहिए, तो 500 रुपये में से 350 रुपये खर्च होंगे। बाकी बचे 150 रुपये आपात स्थिति में काम आएंगे और आपको दूसरों से पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।