Kolkata News: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही सातवें वेतन आयोग को लागू करने का लक्ष्य रखा है। इसका सीधा मतलब है कि मार्च 2027 तक राज्य में सातवां वेतन आयोग प्रभावी हो जाएगा।
बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सातवां वेतन आयोग एक प्रमुख मुद्दा था। मई में बीजेपी की सरकार बनने के बाद राज्य कैबिनेट ने इसके गठन को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी।
वेतन आयोग के लिए नियम और शर्तें तैयार, धीरे-धीरे कम होगा डीए का अंतर
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि सातवें वेतन आयोग के नियम और शर्तें पहले ही तय कर ली गई हैं। अंतिम रूप मिलते ही आयोग का गठन कर दिया जाएगा। सरकार अचानक बदलाव करने के बजाय केंद्र सरकार के साथ महंगाई भत्ते के अंतर को धीरे-धीरे कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केंद्र और राज्य कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते (DA) के अंतर को खत्म करना है। सोशल मीडिया पर एक बार में बड़ी बढ़ोतरी की अटकलों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सावधानीपूर्वक गणना के बाद ही चरणबद्ध तरीके से अंतर को कम किया जाएगा।
कर्मचारियों को बकाया डीए भुगतान का भरोसा, वर्तमान में मिल रहा 38 फीसदी डीए
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनका रुका हुआ बकाया महंगाई भत्ता सही समय पर दे दिया जाएगा। वित्तीय प्रावधानों के तहत सरकार चरणों में इस बकाया राशि का भुगतान करेगी, जिससे राज्य के खजाने पर अचानक अत्यधिक बोझ न पड़े।
हालिया बजट संशोधनों के बाद वर्तमान में राज्य कर्मचारियों को 38 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है। सत्ता में आने के बाद सरकार ने अपने पहले बजट में डीए में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। कर्मचारी संगठन लंबे समय से नए वेतन आयोग और बकाया डीए की मांग कर रहे थे।