Lucknow News: उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग ने करदाताओं के लिए ब्याज माफी योजना लागू की है, जिसके तहत 10 लाख रुपये तक मूल बकाया जमा करने पर 100 प्रतिशत ब्याज माफ होगा। योजना का लाभ लेने के लिए 16 जनवरी 2027 तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। योजना की जानकारी देने के लिए विभाग ने कर अधिवक्ताओं के साथ बैठक की।
उत्तर प्रदेश में राज्य कर विभाग की नई ब्याज माफी योजना के तहत करदाताओं को 10 लाख रुपये तक का मूल बकाया जमा करने पर शत-प्रतिशत ब्याज माफी का लाभ मिलेगा। पात्र करदाता इस योजना का लाभ उठाने के लिए 16 जनवरी 2027 तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और करदाताओं को इसके प्रावधानों से अवगत कराने के उद्देश्य से राज्य कर विभाग ने गुरुवार को कर अधिवक्ता संघों के साथ एक अहम बैठक की।
31 दिसंबर 2025 तक सृजित मांग योजना के दायरे में
शासन और राज्य कर मुख्यालय के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में उपायुक्त नृपेंद्र सिंह सेंगर ने योजना की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न कर कानूनों के तहत 31 दिसंबर 2025 तक पारित आदेशों से उत्पन्न मांगों को इस योजना में शामिल किया गया है।
इसके दायरे में उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम 1948, व्यापार कर अधिनियम 1995, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर (वैट) अधिनियम 2008 और उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम 2007 के तहत बकाया मामले आएंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम 1979, मनोरंजन कर तथा उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली 1997 से जुड़े प्रकरणों को भी योजना से आच्छादित किया गया है।
बैठक में पात्रता और आवेदन प्रक्रिया पर हुआ मंथन
बैठक के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं को योजना की पात्रता शर्तों, मूल बकाया राशि के भुगतान के तरीकों और विभागीय पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया की तकनीकी जानकारी दी गई। विभागीय अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने मुवक्किलों और संबंधित करदाताओं को समय रहते योजना से जोड़ें, ताकि पुराने कर विवादों का निपटारा हो सके और व्यापारियों को वित्तीय राहत मिले।
वरिष्ठ अधिकारी और कर अधिवक्ता रहे मौजूद
बैठक की अध्यक्षता राज्य कर के अपर आयुक्त (ग्रेड-1) संजय कुमार ने की। बैठक में विभागीय अधिकारियों के रूप में संयुक्त आयुक्त आदित्य भारती, नवीन कुमार तथा उपायुक्त आलोक कुमार सचान मौजूद रहे।
वहीं अधिवक्ता संघों की ओर से एजाज अहमद रिजवी, दिव्येंदु नाथ, राजेश नारायण दुबे, विनय राय, आलोक कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार दुबे, अमित विश्वकर्मा, आशुतोष कुमार दुबे, बृजेश कुमार निषाद, रणंजय सिंह, अनंत रावत, राममनोहर श्रीवास्तव, अरुण कुमार सिंह और सतीश चंद्र बंसल सहित कई प्रमुख कर अधिवक्ता उपस्थित रहे।