National News: नौ नवंबर, 2026 से लागू होने वाली गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं की संशोधित एमआरपी सूची में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी सहित प्रमुख पेटेंट दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। फेफड़े, स्तन और ब्लड कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एलेकेंसा, कीट्रूडा और फेस्गो जैसी जरूरी दवाएं पहले की तरह ही महंगी बनी रहेंगी।
नौ नवंबर, 2026 से प्रभावी होने वाली गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं की संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) सूची जारी कर दी गई है। इस नई सूची में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी में उपयोग होने वाली कई प्रमुख कैंसर दवाओं के मूल्यों में कोई कटौती नहीं की गई है। इसके चलते फेफड़ों के कैंसर, स्तन कैंसर, ब्लड कैंसर और बोन मैरो से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों पर दवाओं का भारी आर्थिक खर्च पहले की तरह ही बना रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के उपचार में कई चक्रों में दवाएं दी जाती हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर बड़ा वित्तीय दबाव रहता है। इनमें से कई जीवन रक्षक दवाएं कैप्सूल के रूप में उपलब्ध हैं, जबकि अन्य इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली बायोलॉजिकल दवाएं हैं।
प्रमुख पेटेंट दवाओं की कीमतें स्थिर
संशोधित सूची के अनुसार, विभिन्न प्रकार के कैंसर के इलाज में कारगर कई पेटेंट दवाओं की दरें अपरिवर्तित रखी गई हैं:
- एलेकेंसा (एलेक्टिनिब 150 mg): फेफड़ों के कैंसर में उपयोग होने वाली इस दवा की कीमत 4,30,696 रुपये पर बरकरार है।
- कीट्रूडा (पेम्ब्रोलिजुमैब 100 mg): विभिन्न कैंसर के उपचार में दी जाने वाली इस इम्यूनोथेरेपी दवा का मूल्य 2,16,500 रुपये बना हुआ है।
- टैग्रिसो (ओसिमर्टिनिब 80 mg): यह दवा 1,38,830.83 रुपये की पुरानी कीमत पर ही उपलब्ध रहेगी।
- फेस्गो (पर्टुजुमैब + ट्रास्टुजुमैब 1200 mg): स्तन कैंसर में प्रयुक्त इस दवा की कीमत में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 4,93,266 रुपये पर कायम है।
कम शेल्फ लाइफ वाली दवाओं के आयात पर रोक
दवाओं के मूल्य निर्धारण के साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने एक वर्ष से कम शेष शेल्फ लाइफ यानी एक वर्ष से कम एक्सपायरी डेट वाली दवाओं के आयात पर तत्काल रोक लगा दी है।
मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, लाइसेंसिंग प्राधिकरण आयात की तिथि पर एक वर्ष से कम शेल्फ लाइफ वाली किसी भी दवा को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए नियमों में विशेष प्रविधान किया गया है, जिसके तहत उनके उत्पाद लेबल पर प्रदर्शित शेल्फ लाइफ के न्यूनतम 60 प्रतिशत शेष रहने पर आयात की मंजूरी दी जा सकेगी।