National News: भारत ने आसियान और उसके संवाद साझेदार देशों के साथ आतंकवाद-रोधी अभियानों के अपने व्यावहारिक और युद्ध क्षेत्र में परखे अनुभव साझा करने की पेशकश की है। फिलीपींस में आयोजित एडीएमएम-प्लस सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को स्पष्ट किया।
फिलीपींस के सीबू में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने गुरुवार को कहा कि भारत आसियान और उसके संवाद साझेदारों के साथ आतंकवाद-रोधी अपने युद्ध के मैदान में परखे हुए अनुभव साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति का उदाहरण देते हुए पिछले साल के ‘आपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में बड़ी संख्या में आतंकी ढांचों को नष्ट किया गया था। यह अभियान देश-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के स्पष्ट रुख का खुला एलान था।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की हर रणनीति सफल: रक्षा मंत्री
पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद की ओर इशारा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की हर रणनीति को वास्तविक अभियानों में परखा गया है और वह पूरी तरह सफल साबित हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और मजबूत खुफिया जानकारी साझा करने के जरिए सभी देश अपनी सामूहिक क्षमताओं को और अधिक मजबूत कर सकते हैं।
सुरक्षित हिंद-प्रशांत और समुद्री मार्गों पर जोर
सम्मेलन में राजनाथ सिंह ने कुछ प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज जब वैश्विक व्यापार मार्गों को नए तरह के अंतरराष्ट्रीय खतरों का सामना करना पड़ रहा है, तब केवल समुद्री सुरक्षा पर औपचारिक बयान जारी करना पर्याप्त नहीं है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत में एक भरोसेमंद ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसे सुरक्षित और सुदृढ़ हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करता है, जहां शांति और स्थिरता केवल आकांक्षाएं न हों, बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम बनें।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएनसीएलओएस का पालन जरूरी
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत समुद्री सुरक्षा को क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि से जुड़ा अनिवार्य मुद्दा मानता है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन और विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (यूएनसीएलओएस) पर भारत का जोर किसी देश के खिलाफ नहीं है। साथ ही नौवहन और हवाई क्षेत्र से गुजरने की स्वतंत्रता की वकालत का उद्देश्य क्षेत्र के सभी पक्षों के सामूहिक हितों की रक्षा करना है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच कई आसियान देश और लोकतांत्रिक राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और यूएनसीएलओएस के सख्त अनुपालन की लगातार मांग कर रहे हैं।