Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय न्याय संहिता के शादी के झूठे वादे वाले प्रावधान से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस याचिका को अपमानजनक और बेतुका बताते हुए याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई।
याचिकाकर्ता को भविष्य में सावधानी बरतने की सख्त चेतावनी
पीठ ने वकील एन सुदर्शनाराव द्वारा दायर याचिका पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए इसे न्यायालय की गरिमा के खिलाफ माना। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह भविष्य में ऐसी अपमानजनक याचिका दाखिल करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। इस याचिका में शीर्ष अदालत के दो जजों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग थी।
बीएनएस की धारा 69 और कानूनी सुरक्षा की मांग
इस जनहित याचिका में बीएनएस 2023 की धारा 69 को लागू करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही शादी के झूठे वादे पर शोषण का शिकार महिलाओं को कानूनी व वित्तीय सुरक्षा देने और पुरानी टिप्पणियों को हटाने की अपील थी। भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 धोखे से बनाए संबंध को अपराध मानती है।