Delhi News: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त करने के बाद खुद पर लग रहे आरोपों पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने अस्पताल से वीडियो जारी कर कहा कि अगर उन्हें सरकार से डील करनी होती, तो भीषण गर्मी में 26 दिनों तक भूखा रहकर 11 किलो वजन न घटाते।
आरोपों पर सोनम वांगचुक का पलटवार
सोनम वांगचुक ने कहा कि वह बेहद दुख और गुस्से में यह वीडियो बना रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 26 दिन भूखे रहने के बाद भी क्या उन्हें अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए चरित्र प्रमाण पत्र देना पड़ेगा। डील करने के लिए एयरकंडीशन कमरे में बैठकर भी बातचीत की जा सकती थी, जिसके लिए अनशन की जरूरत नहीं होती।
अस्पताल को बताया जेल और छावनी
वांगचुक ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को जब उन्हें जंतर-मंतर से जबरन सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, तो वह अस्पताल नहीं बल्कि जेल जैसा था। वहां किसी भी बाहरी व्यक्ति या लद्दाख से आए शुभचिंतकों से मिलने की इजाजत नहीं थी। मोबाइल और लैपटॉप रखने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई थी और संदेश भेजने पर भी कड़ा पहरा था।
अस्पताल से बाहर निकलने पर हुई बहस
उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद भी उन्हें अस्पताल से जाने नहीं दिया जा रहा था। इसके बाद उन्हें जबरन बाहर निकलने के लिए अस्पताल के भीतर एक और हड़ताल करनी पड़ी। इस दौरान पुलिस से बहस हुई और वे जमीन पर लेट गए। इसके बाद मेदांता अस्पताल में भी कड़ी सुरक्षा और पाबंदियां जारी रखी गईं।