बच्चों को सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बचाने के लिए लोकसभा में पेश होगा प्राइवेट मेंबर्स ‘शील्ड बिल 2025’

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New Delhi News: संसद में बच्चों को इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा विधायी कदम उठाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद बैजयंत पांडा ने लोकसभा में बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाने से जुड़ा ‘शील्ड बिल 2025’ नाम का प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है।

सांसद बैजयंत पांडा के अनुसार, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स को इस तरह तैयार किया जाता है कि छोटे बच्चों को इनकी गंभीर लत लग जाती है। यह स्थिति बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहद हानिकारक साबित हो रही है। इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार और संसद इस विषय पर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं।

शील्ड बिल 2025 का मुख्य उद्देश्य 13 साल से कम उम्र के बच्चों को इंटरनेट पर पूरी तरह सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। इसके साथ ही डिजिटल सेवा देने वाली टेक कंपनियों की कानूनी जवाबदेही तय करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। हालांकि सदन में बार-बार हुए हंगामे और स्थगन के कारण यह महत्वपूर्ण विधेयक शुक्रवार को पेश नहीं किया जा सका।

नए प्रस्तावित कानून के लागू होने से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कई कड़े नियम लागू हो जाएंगे:

  1. अभिभावकों की लिखित अनुमति 13 साल से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता या अभिभावकों की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर नया अकाउंट नहीं बना पाएंगे।
  2. पैरेंटल कंट्रोल डैशबोर्ड सभी टेक कंपनियों के लिए ऐप में ऐसा फीचर देना अनिवार्य होगा, जिससे अभिभावक स्क्रीन टाइम, एक्टिविटी और प्राइवेसी सेटिंग्स को खुद आसानी से पूरी तरह नियंत्रित कर सकें।
  3. नुकसानदेह कंटेंट पर त्वरित कार्रवाई अनुचित या हानिकारक कंटेंट की रिपोर्ट मिलने पर कंपनियों को उसे 36 घंटे के भीतर हटाना होगा। बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों में 24 घंटे की सीमा तय की गई है और ऐप पर रिपोर्ट चाइल्ड हार्म बटन देना अनिवार्य होगा।
  4. 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना नियमों का उल्लंघन करने वाली टेक कंपनियों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकेगा। बार-बार लापरवाही बरतने वाली कंपनियों और ऐप्स को भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
  5. डेटा प्राइवेसी और विज्ञापनों पर सख्त रोक कंपनियों को बच्चों के संभावित खतरों पर वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी। इसके अलावा, उम्र सत्यापन के दौरान जुटाए गए बच्चों के व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल टारगेटेड विज्ञापन दिखाने या प्रोफाइलिंग के लिए करने पर पूरी तरह रोक होगी।

दुनिया के कई देशों ने बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए कठोर कदम उठाए हैं। ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इसके अलावा इंडोनेशिया, तुर्की और ब्राजील जैसे देशों ने भी बेहद सख्त नियम बनाए हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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