Delhi News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस साल के अंत तक अपने देश लौटने की योजना बना रही हैं। इस बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें भारतीय जमीन से किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने संसदीय समिति को यह अहम जानकारी दी है।
विदेश मंत्रालय ने विदेश मामलों की स्थायी समिति को बताया कि बांग्लादेश से मिले प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार जारी है। भारत सरकार के सक्षम अधिकारी कानून और तय नियमों के तहत इस मामले की जांच कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुवाई वाली समिति ने भारत के इस मानवीय दृष्टिकोण की सराहना भी की है।
विदेश मामलों की समिति ने दी मानवीय दृष्टिकोण की सलाह
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गंभीर संकट का सामना कर रहे लोगों को शरण देना भारत की पुरानी परंपरा रही है। हालांकि, समिति ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी सीमा से किसी अन्य देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधि न होने देने के सख्त सिद्धांत का पालन हमेशा करते रहना चाहिए।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सरकार को अपने सिद्धांतों और मानवीय रुख को बनाए रखना चाहिए। ऐसे संवेदनशील मामलों को सही समझ के साथ संभालना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही समिति ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरी तरह सामान्य करने का सुझाव भी दिया है।
गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर तुरंत बातचीत की सिफारिश
सुरक्षा कारणों से बंद रहने के बाद भारत ने 28 जून 2026 से बांग्लादेशियों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवा शुरू कर दी है। समिति ने चिंता जताई कि वीजा में देरी से द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा 1996 में हुई ऐतिहासिक गंगा जल संधि भी इस साल खत्म होने वाली है।
समिति ने सरकार से बिना किसी देरी के ढाका के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। यह चर्चा नए डेटा और जलवायु परिवर्तन के अनुमानों पर आधारित होनी चाहिए। इस बातचीत में पश्चिम बंगाल और बिहार सरकारों को शामिल करने तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।