New Delhi News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के साथ पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष को टालने का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर कश्मीर का पुराना राग अलापते हुए कई निराधार दावे किए।
ट्रंप के दखल का दावा और भारत का पुराना रुख
शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के समय पर हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बच गई। हालांकि, नई दिल्ली इस तरह के किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को लगातार खारिज करती रही है। शरीफ ने अपने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रयासों की भी सराहना की।
उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने पिछले साल छह-सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। भारतीय सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को सटीक कार्रवाई कर पूरी तरह तबाह कर दिया था।
कश्मीर और सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान का बयान
शरीफ ने 23 मिनट के भाषण में कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान बेहद जरूरी है। भारत हमेशा दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। भारत हमेशा की तरह इस बार भी राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब देगा।
पाकिस्तानी पीएम ने भाषण में सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया। भारत ने पहलगाम हमले के बाद इस संधि को स्थगित करने का कड़ा फैसला लिया था। भारत स्पष्ट कह चुका है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक यह संधि पूरी तरह से सस्पेंड रहेगी।