Delhi News: देश में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का रुख इस चर्चा के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर भी आरक्षण नीति में बदलाव को लेकर डिजिटल अभियान तेजी से चल रहे हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का फायदा मिल चुका है, उन्हें अब स्वेच्छा से पीछे हट जाना चाहिए। इससे उनके समुदाय के अन्य जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा। आरक्षण की समयसीमा पर उन्होंने सीधा जवाब न देकर डॉ. भीमराव अंबेडकर की सलाह का पालन करने की बात कही। उन्होंने सब-कैटेगराइजेशन की मांग को भी सही ठहराया।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने आरक्षण में आय-आधारित उप-वर्गीकरण (सब-कोटा) की याचिका का जोरदार विरोध किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का मुख्य आधार आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक पिछड़ापन है। केंद्र के अनुसार SC और ST वर्गों में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता और सूचियों में बदलाव का अधिकार केवल संसद को है।
इसके अलावा, मई 2026 में अभिजीत दिपके द्वारा शुरू की गई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का धरना खत्म होने के बाद इंस्टाग्राम पर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ तेजी से फैला। इस अभियान और कुछ रैपरों के विरोध प्रदर्शनों ने युवाओं के बीच डिजिटल बहस बढ़ा दी है। आरक्षण का उद्देश्य सदियों से पिछड़े समुदायों को मुख्यधारा में लाना है